
दमोह। जिले का एक दिवसीय युवा प्रशिक्षण शिविर आज गायत्री शक्तिपीठ पथरिया में सम्पन्न हुआ। जिसमें दमोह और पथरिया क्षेत्र के लगभग 400 युवा सम्मलित हुए।
सर्व धर्म प्रार्थना से शिविर की शुरुआत करते हुए कटनी से आए गायत्री परिवार के जिला समन्वयक प्रफुल्ल सोनी ने कहा कि गायत्री सार्वभौमिक ईश्वर की प्रार्थना है। आपके ऊपर गायत्री साधना का प्रभाव क्या हो रहा है तो उसको चार चिन्हों से समझा जा सकता है। आपके मन मे अपने कार्य को करने की जिम्मेदारी आ रही है या नही, आपकी समझदारी बढ़ रही है या नही, आप अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार हो रहे हो रहे हैं या नहीं और इन सबको करते हुए आपके अंदर का भय दूर हुआ या नही, अर्थात आप बहादुर बने या नहीं।
यही चार प्रारंभिक पहचान हैं गायत्री साधकों की। आप 24 घंटो में अपनी रोज़ी रोटी कमाने के साथ साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को भी ईमानदारी के साथ निभाना प्रारंभ कर देते हो। प्रतिदिन कम से कम दो घंटे का समय लोकोपयोगी कार्यो के लिए निकालने लगते हो तो आप अपने जीवन को धन्य बना लेतो हो।सिर्फ माला जपना ही पूजा नहीं होती। पीड़ित मानवता की सेवा ही सच्ची पूजा है। उन्होंने कहा कि आप अपने आप को स्वस्थ रखते हुए नशा, मांसाहार जैसे दुर्गुणों से दूर रहकर मनुष्य में देवत्व के उदय को चरितार्थ करते हुए धरती पर स्वर्ग के अवतरण को संभव बनाते चले जाते हो।
ओजस्वी वीर रस के प्रज्ञा गीतों से विश्वजीत ने युवकों में नया जोश पैदा कर दिया। आज युग पुकारता, जाग नौ जवान रे।
मोरचे संभाल तू, संभाल तू कमान रे। गीत ने तो जोश के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। शैलेश सोलंकी ने सिंथेसाइजर से गीतों में रस भर दिया। शिविर के अंत मे आभार प्रदर्शन करते हुए वरिष्ठ परिजन इंजीनियर भीष्म जैन ने अपने संस्मरण सुनाते हुए युवकों से आव्हान किया कि वे अपनी जवानी और जोश का सदुपयोग करते हुए समाज को नई दिशा प्रदान करें।

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