
दमोह दमोह में लंबे समय से संजीवनी क्लीनिक में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे दो डॉक्टर्स को गिरफ्तार किया है. वहीं उनका सहयोग करने वाले जबलपुर निवासी एक फर्जी डॉक्टर को भी हिरासत में लिया है.
मिशन अस्पताल में आठ लोगों की जान लेने वाले फर्जी डॉक्टर एन जॉनकेम के मामले की अभी सुनवाई चल रही है और फैसला भी नहीं हुआ है कि दमोह में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर दमोह कोतवाली ने दो फर्जी डॉक्टर्स को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है. वही जबलपुर निवासी एक अन्य डॉक्टर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. इस बात का खुलासा पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने किया है. बताया जाता है कि सीएमओ के कार्यालय में एक गोपनीय शिकायत की गई थी. जिसमें सुभाष कॉलोनी स्थित संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ फर्जी डॉक्टर सचिन यादव पुत्र छत्रपाल सिंह यादव निवासी ग्वालियर तथा राजपाल गौर पुत्र रमेश गौर निवासी जिला सीहोर पिछले एक वर्ष से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे थे. जब स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर पर डॉक्टर द्वारा दिए गए पंजीयन की जांच की तो पता चला कि वह पंजीयन किसी और के नाम पर दर्ज हैं. कुछ और पड़ताल करने पर कूट रचित दस्तावेज सामने आए जो की नियुक्ति के समय डॉक्टर ने प्रस्तुत किए थे. इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर राजेश अठ्या ने मामले की शिकायत कोतवाली में दर्ज कराई. जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने मामले की पूरी जांच की तथा दोनों डॉक्टर को गिरफ्तार किया है. पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने बताया की अपराध क्रमांक 479 / 26 की धारा 318 (3), 328, 326 (3), 340 (2 ) बीएनएस के तहत दोनों डॉक्टर्स पर दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं. दरअसल इन दोनों डॉक्टर्स की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संजीवनी क्लिनिक सुभाष कॉलोनी में की गई थी. चयन प्रक्रिया के दौरान सचिन यादव ने बीडीएस की कूट रचित डिग्री काउंसिल रजिस्ट्रेशन एवं अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए थे. वहीं राज्यपाल यादव ने एमबीबीएस की डिग्री प्रस्तुत की थी. पुलिस अधीक्षक श्री कलादगी ने बताया कि जब दोनों डॉक्टर्स से सख्ती से पूछताछ की गई तो उन्होंने जबलपुर के फ़िलहाल चेरीलाल निवासी फर्जी डॉक्टर अजय मौर्या पुत्र मनीराम मौर्य को हिरासत में लिया जो जौरा मुरैना का रहने वाला है. उसने इन दोनों डॉक्टर के कूट रचित दस्तावेज बनवाने में मदद की थी. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पैसा लेकर के कई लोगों के फर्जी दस्तावेज तैयार करने करने के मामले में कुछ और लोगों के नाम सामने आए हैं जिनकी पुलिस तलाश कर रही है. राज्य स्तर की संस्था के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों से नियुक्तियां करना बहुत ही गंभीर और संवेदनशील विषय है. सभी संजीवनी अस्पताल आमजन के बीच में संचालित है. जिससे जनमानस का स्वास्थ्य इलाज सीधा जुड़ा हुआ है. इसमें भोपाल स्तर की संस्थाओं की भूमिका भी संदिग्ध है

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