दमोह. प्रशासनिक आदेश को निजी स्कूल संचालक ठेंगा दिखा रहे हैं. आदेश के बाद भी मनमाने तरीके से स्कूल संचालित करने का आदेश जारी किया गया है लेकिन प्रशासन पंगु बना है.
प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही निजी संस्थाएं कलेक्टर के आदेश का कितना पालन करती हैं यह किसी से छिपा नहीं है. अभी तक तो केवल शासकीय अधिकारी ही कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिख रहे थे लेकिन अब निजी स्कूल भी पूरी तरह से मनमानी पर उतर आए हैं. ऐसा पहली नहीं बल्कि दूसरी बार हो रहा है. वहीं जिला कलेक्टर पंगु बने बैठे है. कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को दमोह में चार्ज संभाले हुए करीब दो महीने बीत गए हैं. इन दो महीना में उन्होंने जनहित से संबंधित काम तो बहुत किए और वाहवाही भी लूटी है लेकिन वहीं दूसरी ओर अपने ही प्रशासनिक अधिकारियों पर न तो वह कार्रवाई कर पा रहे हैं और निजी संस्थानों पर नकेल कस पा रहे हैं. निजी संस्थानों के सामने कलेक्टर बेवस बने हुए हैं. भीषण गर्मी को देखते हुए कलेक्टर ने 6 दिन पूर्व भी आदेश जारी किया था कि आगामी आदेश तक निजी और शासकीय सभी शिक्षण संस्थाएं सुबह 7:00 बजे से लेकर अधिकतम दोपहर 12:00 तक ही संचालित की जाएं. लेकिन इन सब के बीच गुरु नानक हायर सेकेंडरी स्कूल ने नया आदेश जारी किया है जिसमें सुबह 8:45 से दोपहर 1:00 बजे तक स्कूल संचालित करने का निर्देश दिया गया है. ऐसे में बच्चे करीब दोपहर 2:00 बजे तक अपने घर पहुंच पाएंगे. निजी स्कूल का यह आदेश इस बात की पुष्टि करता है कि उन्हें कलेक्टर की कार्रवाई जरा भी भय नहीं है. इसके पूर्व भी जब कलेक्टर ने दमोह में पदभार ग्रहण किया था उस समय परिणाम आने के बाद एक माह के ग्रीष्मकालीन स्कूल संचालित हो रहे थे तब भी स्कूलो ने मनमाने तरीके से दोपहर 12:00 की बजाय 1:00 छुट्टियां की थी.
*कब क्या हुआ*
अप्रैल के महीने में कलेक्टर के आदेश के बाद की कई निजी स्कूलों में दोपहर 12:00 बजे की बजाय 1:00 बजे तक भीषण गर्मी स्कूल संचालित किए थे. उसके बाद हाई कोर्ट के आदेश पर जब हटा नाका स्थित एक शराब दुकान पर कार्रवाई की जाना थी तब भी कलेक्टर और हाईकोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर आदेश का पालन नहीं किया. लिहाजा कलेक्टर को खुद ही जाकर कार्रवाई करना पड़ी. तीसरा मामला जनसुनवाई में अभी सामने आया जब उन्होंने एक चक्की संचालक का बिजली कनेक्शन तुरंत जोड़ने के आदेश बिजली विभाग को दिए थे. लेकिन कार्यपालन यंत्री मोतीलाल साहू ने अधिकारियों और आमजन की मौजूदगी में कलेक्टर को साफ साफ कह दिया कि वह बिजली कनेक्शन नहीं जोड़ेंगे. क्योंकि नियम अनुसार बिना बिल जमा हुई बिजली कनेक्शन जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है. यह उदाहरण बताते हैं कि कलेक्टर भले ही जनता के बीच में कितने ही लोकप्रिय क्यों ना हो जाए, लेकिन निजी संस्थाओं और अपने अधीनस्थ कर्मचारी और अधिकारियों के सामने वह बौने साबित हो रहे हैं.


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