मार्च 17, 2026

क्रोधाग्नि को शीतलता से शांत करें: आर्यिका गुणमति माता जी

हटा से संजय जैन। क्रोध मनुष्‍य के विवेक और होश को समाप्‍त कर देता है। क्रोधी व्‍यक्ति पागलपन की हरकतें करने लगता है। वह यह भी भूल जाता है कि हम क्‍या कर रहे हैं, क्‍या परिणाम होंगे। क्रोधी व्‍यक्ति की आंखे तो होती है लेकिन उसे दिखाई नहीं देता है। कान होता है पर सुनाई नहीं देता है। क्रोध के दौरान इंसान के शरीर में जहर उत्‍पन्‍न होने लगता है। शिशुवती मां को क्रोध के दौरान अपने नवजात को स्‍तनपान नहीं कराना चाहिए। ऐसे में शिशु का स्‍वभाव क्रोधी हो जाता है। यह बात श्री पार्श्‍वनाथ दिगम्‍बर जैन मंदिर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती आर्यिका श्री गुणमति माता जी ने पर्वराज पर्यूषण पर्व के प्रथम दिवस उत्‍तम क्षमा पर अपने मंगल प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि क्रोध को बैर का रूप न दें। यह भवो भवो तक कष्‍ट प्रदान करता है। क्रोध अग्नि को क्षमा की शीतलता से शांत करें। क्षमा मांगें, क्षमा प्रदान करें। झगड़ा विवाद होना कोई नई बात नहीं है। अनादिकाल से यह चला आ रहा है। विवाद का टालना ही हितकारी होता है। अधिकांश घरों में संपन्नता तो है लेकिन रिश्‍ते ऐसे है कि कोई एक दूसरे से बात भी नहीं करता। देखकर मुस्‍कराता भी नहीं है। मुस्‍कराने की पहल आप करो निःसंदेह सामने वाला भी मुस्कराएगा। जो बात गुस्‍सा में कहते हो वह हंसकर भी कही जा सकती है। यही क्षमा का रूप है।
पर्वराज पर्यूषण पर्व पर नगर के चारों जैन मंदिर में नित्‍य संगीतमय अभिषेक, शांतिधारा, पूजन विधान प्रारंभ हो गया है। मुख्‍य कार्यक्रम आर्यिका संघ के सानिध्‍य में चल रहा है। आर्यिका संघ के सानिध्‍य में ही आज बालिका संस्‍कार शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविर में सभी बालिकाएं, महिलाएं निर्धारित ड्रेस में मंदिर पहुंची। जहां संजय भैया मुरैना के निर्देशन में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन हुआ। शांतिधारा करने का सौभाग्‍य प्रदीप जैन शिक्षक, नीर कुमार एवं कोमल चन्‍द्र चक्रेश लालू जैन को प्राप्‍त हुआ।
विगत 45 दिनों से मंदिर में चल रही तत्‍वार्थ सूत्र क्‍लास की बालिका दीप्ति जैन ने संस्‍कृत में ही मौखिक 10 अध्‍याय का वाचन किया। तो अभिभावकों सहित सकल समाज ने बालिका की एवं नगर में बढ़ रही धर्म प्रभावना की सराहना की। साथ ही कहा कि आज अंग्रेजी माध्‍यम के स्‍कूलों में अध्‍ययनरत बच्‍चे हिन्‍दी भी अच्‍छे से नहीं पढ़ पा रहे हैं वही यहां बच्‍चों को संस्‍कृत में प्रदान ज्ञान कंठस्‍थ हो रहा है। दीप्ति को निशा दीदी के द्वारा श्रुत संदूक प्रदान कर सम्‍मानित किया गया।

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