मार्च 17, 2026

हटा विधायक को नहीं पता राष्ट्रगान हिन्दी में लिखा या संस्कृत में

दमोह. शिक्षक से विधायक बनी उमा देवी खटीक का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें उनके सामान्य ज्ञान पर सवाल खड़े हो रहे हैं. राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में वह अंतर नहीं कर पा रही है. उनकी गलत जानकारी पर अब लोग चुटकियां ले रहे हैं.

     प्राथमिक शाला शिक्षक से जनप्रतिनिधि बनी हटा विधायक उमादेवी खटीक को देश के बारे में प्राथमिक जानकारी ही नहीं है. उन्हें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अंतर भी नहीं मालूम है. उन्हें यह भी नहीं पता कि राष्ट्रगान कितने समय में पूरा किया जाता है, और न उन्हें यह पता है कि राष्ट्रगान संस्कृत में होता है या हिंदी में. इसकी ताजा बानगी हटा विधानसभा क्षेत्र के पटेरा नगर में देखने मिली. जब वह तिरंगा यात्रा में शामिल होने पहुंची थी. तिरंगा यात्रा के बाद विधायक उमा देवी खटीक ने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री ने प्रतिवर्षानुसार की तरह तिरंगा यात्रा निकालने का जो आव्हान किया है उसमें हमारा और देशवासियों का कर्तव्य है कि अपनी तिरंगा यात्रा और अपनी संस्कृति का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय ध्वज की रक्षा करें. हमारे देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अडिग रहे. जिस प्रकार हमारे देश के वीर जवान सीमा पर डटे हुए हैं इसलिए हम सुरक्षित हैं. जब मीडिया ने उनसे पूछा कि आप कई वर्षों तक शिक्षक रही हैं और तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुई है, क्या आप राष्ट्रगान सुना सकती हैं ? इस पर उन्होंने कहा मैं बिल्कुल सुना सकती हूं, लेकिन मुझे संस्कृत वाला राष्ट्रगान नहीं आता मैं तो हिंदी का राष्ट्रगान ही सुना सकती हूं.

क्या पढ़ाया होगा बच्चों को ?

श्रीमती खटीक को यहीं नहीं रुकी उन्होंने यह भी कहा कि 1952 में राष्ट्रगान को रविंद्र नाथ टैगोर ने लिखा था और इसे 52 मिनट में पूरा किया जाता है. शायद उमा देवी खटीक का सामान्य ज्ञान बहुत कमजोर है उन्हें यह नहीं पता कि राष्ट्रगान हिंदी में ही लिखा गया था. संस्कृत में राष्ट्रगीत ( वंदे मातरम) लिखा गया था. राष्ट्रगान 52 मिनट में नहीं बल्कि 52 सेकंड में पूरा किया जाता है. जबकि उसके संक्षिप्त संस्करण में 20 सेकंड लगते हैं. इसके बाद उन्होंने पूरे जोश के साथ राष्ट्रगान शुरू किया लेकिन वह बीच में कई बार अटकी, शब्दों का गलत प्रयोग किया और राष्ट्रगान भूल भी गई. अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब देश की ऐसे जनप्रतिनिधि जो स्वयं शिक्षक रहे हो उसके बाद राजनीति में आए हो उन्हें देश की जानकारी नहीं है, तो वह बच्चों को कैसे पढ़ाते होंगे. गौरतलब है की श्रीमती उमा देवी खटीक हटा के बजरिया बोर्ड प्राथमिक स्कूल में करीब 20 साल तक प्राइमरी शिक्षक रही हैं. उसके बाद प्रमोशन पर वह बीएससी भी बनी थी. लेकिन 2003 उन्होंने कंडीशनल रिजाइन दिया और भाजपा के टिकट पहली बार  विधायक बनी थी. इसके 2008 में भी विधायक रहीं. 2018 में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था. लेकिन 2023 में उन्हें तीसरी बार विधायक चुना गया. दमोह जिले में सर्वाधिक करीब 54000 वोटो से उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के प्रदीप खटीक को शिकस्त दी थी.

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