
दमोह। महज 33 रुपए दिन में काम कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं का गुस्सा आज फूट पड़ा। उन्होंने कलेक्टर की गाड़ी रोक कर अपनी मांगे रखी तथा मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।
मानदेय बढ़ाने के लिए लंबे समय से मांग कर रही आशा कार्यकर्ताओं ने आज से बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है। आशा कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर चौक से एक पैदल रैली कलेक्ट्रेट तक निकाली एवं सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। आशा कार्यकर्ताओं ने कहा की घोषणा के बाद भी शिवराज सरकार अब हमारा बढ़ा हुआ मानदेय नहीं दे रही है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि एक मजदूर का वेतन भी ₹300 दिन है लेकिन हम आशा कार्यकर्ता महज ₹33 दिन में काम कर रही हैं। हमें ₹2000 मानदेय मिलता है लेकिन हजार रुपए तो ऑटो रिक्शा और अन्य आवागमन में ही खर्च हो जाता है। इस तरह ₹1000 ही हमारे हाथ में आता है। उस हिसाब से तो ₹33 दिन ही हमें मानदेय मिल रहा है। इतने कम मानदेय में आखिर हम अपना परिवार का भरण पोषण कैसे करें। जबकि हम कार्यकर्ता 24 घंटे काम करती हैं। कार्यकर्ताओं ने, चाहे जो मजबूरी हो हमारी मांगे पूरी हो अभी तो यह अंगड़ाई है आगे और लड़ाई है के नारों के साथ अपनी आवाज बुलंद की।
और फिर कलेक्टर की गाड़ी रोक ली
आशा कार्यकर्ता जब कलेक्टर को ज्ञापन देने जा रही थी उसी दरमियान कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकना चाहा। तो वह बीच सड़क पर ही धरने पर बैठ गई। इसी दौरान जब कलेक्टर एस कृष्ण चैतन्य वहां से गाड़ी में बैठकर निकलने लगे तो उन्होंने नाकेबंदी कर उनकी गाड़ी रोक ली एवं अपना ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याएं उन्हें बताई। साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि 7 दिवस के भीतर उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो वह इसी कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ जाएंगी।
मात्र 66 रुपए दिन में गुजारा
जिले भर में 1380 आशा कार्यकर्ता एवं सहयोगी हैं। उन्हें ₹2000 मासिक मानदेय मिलता है। इस हिसाब से उन्हें महज ₹66 दिन में अपने परिवार का गुजारा करना पड़ता है जबकि महंगाई चरम पर है। सरकार द्वारा अकुशल श्रमिक के लिए भी ₹180 की न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है। इस हिसाब से देखा जाए तो आशा कार्यकर्ता का वेतन एक मजदूर से भी बहुत कम है।
हमारे साथ भेदभाव क्यों
आशा कार्यकर्ता संगठन की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती ममता पटेल कहती हैं कि जब विधायक मंत्रियों को अपने वेतन भत्ता बढ़ाना होते हैं तो वह कोई कमेटी गठित नहीं करते और मनमाने तरीके से दो- ढाई लाख रुपए अपना वेतन बढ़ा लेते हैं। लेकिन हम कार्यकर्ताओं को महज ₹33 दिन में काम करना पड़ रहा है। आखिर शिवराज सरकार भेदभाव हम लोगों के साथ ही क्यों कर रही है। हम पूर्व की भांति चौबीसों घंटे काम करेंगे लेकिन सरकार से हमारा निवेदन है कि हमें बढ़ा हुआ मानदेय ₹10000 महीना दिया जाए।

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