मार्च 17, 2026

चोट पहुंचाने वाला हर कोई शत्रु नहीं होता: आर्यिका श्री

हटा में चल रहे महामंडल विधान का समापन

हटा से संजय जैन। जैन धर्म ध्‍वजा फहराने वाले संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती आर्यिका रत्‍न गुणमती माता जी का ससंघ पावन वर्षायोग मंगल कलश स्‍थापना समारोह उत्‍साह से मनाया गया। समारोह में नगर के साथ साथ दूर दूर से बडी संख्‍या में भक्‍त आए हुए थे।
इस पवन बेला पर आर्यिका गुणमती माता जी ने वर्षायोग का महत्‍व बताते हुए अपने मंगलाशीष में कहा कि आप जब भी धर्मसभा में आएं तो जाग्रत होकर ही आएं। जो नींद में सोया है उसे कैसे जाग्रत कर सकते है। जलता हुआ दीप बुझे दीप को प्रज्‍जवलित कर सकता है। संत, आचार्य, भगवान तो जलते हुए दीप की तरह होते हैं। जो आध्‍यात्‍म का दीप लेकर आप लोगों को आलोकित करते हैं। आर्यिका श्री ने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि आप जो भीड़ भरी दुनिया में घर परिवार में रहकर अपने आप से कैसे जुड़ सकते हैं, अपने जीवन को कैसे धन्‍य कर सकते हैं यह बताएंगे। कोशिश रहेगी आपको बताएंगे कि रोजमर्रा की चर्या कर्तव्‍य दायित्‍व का भली भांति निर्वाहन करते हुए परमात्‍मा से कैसे संबंध स्‍थापित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपको सुधारने की मैं कोई गारंटी नहीं लूंगी। क्योंकि सुधरना आपको है। आपको मन हृदय के कपाट खुले रखना होंगे। जिनवाणी आपके द्वार पर दस्‍तक देगी। लेकिन कपाट ही बंद मिले तो फिर कोई क्‍या कर सकता है। मन हृदय के कपाट की चाबी भी भीतर वाले के पास होती है। यदि कोई धक्‍का देकर भी खोलने का प्रयास करेगा तो वह असफल ही होगा। जिस प्रकार सूर्य अपने समय पर उदित होकर अपने प्रकाश की किरणों को चारो ओर बिखेरता है। सूर्य की किरणें इंतजार करती हैं दरवाजे खुलने का ताकि घर के अंदर तक प्रकाशित किया जा सके। इसी तरह गुरूवाणी, प्रभुवाणी सूर्य की उन किरणों के समान है जो सबको समान रूप से लाभांवित करती है। एक समय के बाद वे अनंत आकाश में समाहित हो जाती हैं। आर्यिका श्री ने कहा कभी कभी कोई आपको जाग्रत करने चोट पहुंचाते हैं। बुलडोजर भी चलाते हैं, लेकिन हर चोट पहुंचाने वाला शत्रु नहीं होता है। मां के प्रहार को प्रहार न मानकर उसे उपहार मानें तो यह जिन्‍दगी त्‍यौहार बन जाएगी। वही प्रहार आशीर्वाद होगा। चोट पहुंचाने वाला शिल्‍पी पत्‍थर को मूर्ति का रूप देता है। वह पत्‍थर का शत्रु नहीं होता है। कुंभकार माटी को पीटकर एक आकार देता है। डॉक्टर चाकू कैंची प्राण की रक्षा के लिए चलाता है। आर्यिका श्री ने कहा कि मैं इतनी समर्थ तो नहीं कि सूर्य को उतारकर आपके हाथों में थमा दूं, लेकिन मेरा यह प्रयास होगा कि छोटा सा दीप आपके हाथों में थमा सकती हूं।
मंगलाचरण से हुई कलश स्थापना
इसके पूर्व श्री पार्श्‍वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर परिसर में आयोजित कलश स्‍थापना का शुभारंभ बहु मंडल की नीलम, शालिनी, निधि, शिखा के द्वारा प्रस्‍तुत मंगलाचरण से हुआ। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण चारों मंदिर के पदाधिकारियों के द्वारा किया गया। ज्ञान ज्‍योतिदीप का प्रज्‍जवल्‍लन बालिका मंडल, महिला मंडल, सौधर्म परिवार के द्वारा किया गया। सभी श्रद्धालुओं के द्वारा सामूहिक रूप से संगीतमय आचार्य श्री का पूजन किया गया। आर्यिका संघ को शास्‍त्र भेंट करने का सौभाग्‍य भी भक्‍तों को मिला। चातुर्मास मंगल कलश स्‍थापना का सौभाग्‍य राजमती, अभिषेक जैन परिवार, सेठ दीपक जैन, विपिन जैन परिवार शिवनगर जबलपुर के भक्‍त एवं आर्यिका ध्‍येयमती के गृहस्‍थ जीवन परिवार के सदस्‍यों को मिला। संगीत मंडली के द्वारा भजनों की प्रस्‍तुती दी गई।सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन अवसर पर श्रीजी की भव्‍य शोभायात्रा नगर में निकाली गई। कार्यक्रम का संचालन ब्रम्‍हचारी अशोक भैया के द्वारा किया गया।

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