मार्च 17, 2026

जन कल्याण की भावना के साथ यज्ञ भगवान को आहुतियां देकर गायत्री परिजनों ने किया गुरु पूजन

दमोह। आज गुरुपूर्णिमा पर स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ में परिजनों ने प्रातः गुरुपूजन, व्यास पूजन के पश्चात बड़ी ही श्रद्धा पूर्वक पंच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में अपनी आहुतियां समर्पित कर जनकल्याण की कामना की।
आचार्य पंडित वीरेंद्र गर्ग, हरिनारायण दुबे एव जिला संयोजक बीपी गर्ग ने मंच से यज्ञ का संचालन करते हुए सूक्ष्मजगत में व्याप्त महामारी, मनोरोग एवं अमंगल को दूर करने विशेष आहुतियां समर्पित करवाई।गायत्री हाल में बनी यज्ञशाला में बैठे सैकड़ो परिजनों ने यज्ञ देवता से अच्छी वर्षा के साथ पर्यजन्य वर्षा के लिये भी प्रार्थना की। गुरुपूर्णिमा के अवसर पर आज अनेक भाइयो ने आचार्य श्रीराम शर्मा जी की गुरुदीक्षा भी ली एवं उपस्थित पुराने परिजनों ने इस दीक्षा संस्कार को अपनी दीक्षा का नवीनीकरण माना।
गुरुदीक्षा से होती है द्विजत्व की प्राप्ति
इस मौके पर पंडित बीपी गर्ग ने अपने उदबोधन में बताया कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु क्यों आवश्यक है। सद्गुरु से दीक्षा लेने के बाद ही व्यक्ति को द्विजत्व मिलता है। अर्थात जन्म से तो सभी शूद्र होते हैं किंतु दीक्षा से मनुष्य को द्विजत्व की प्राप्ति होती है। जो उसकी आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक होती है। पंडित वीरेंद्र गर्ग ने बताया कि जिस प्रकार पानी पीजिए छानकर, उसी प्रकार गुरु कीजिए जानकर। लोभी गुरु और लालची चेला, दोनो नरक में ठेलम ठेला। अर्थात जो व्यक्ति खुद ही लोभ, मोह, लालच नहीं छोड़ सकता वह अपने चेले को कैसे मोक्ष दिला सकता है। सभी उपस्थित परिजनों ने देव दक्षिण के रुप में अपनी अपनी एक एक बुराई छोड़ने का संकल्प यज्ञ भगवान की साक्षी में लिया। शाम को विशाल दीपयज्ञ के माध्यम से कोरोना महामारी से पीड़ित व्यक्तियों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए एवं इस महामारी से जो असमय दिवंगत हो गए हैं उनकी आत्मा की शांति के लिए विशिष्ट आहुतियां प्रदान की गईं।

प्रज्ञापीठ में भी हुआ गुरु पूजन

इसी तरह बड़ी देवी मंदिर स्थित गायत्री प्रज्ञा पीठ में भी 1 कुंडीय यज्ञ के माध्यम से लोगों ने गुरु पूजन करते हुए अपनी आहुतियां दी। अतिथि वक्ताओं ने विस्तार से गुरु पूजन एवं यज्ञ महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि गुरु हमें भौतिक से आध्यात्मिक जगत की ओर ले जाता है जबकि शिक्षक हमें भौतिक जगत का ज्ञान देता है इसलिए गुरु की महिमा सभी जगह सभी वेदों में गाई गई है बगैर गुरु के हम भवसागर से पार नहीं रख सकते हैं इसलिए गुरु पूजन कर हम अपनी बुराइयां गुरुदेव को समर्पित करते हैं और उनकी बताएं चिंतन और मार्ग पर चल कर अपना जीवन धन्य बनाते हैं। कार्यक्रम में शक्तिपीठ के व्यवस्थापक पंकज हर्ष श्रीवास्तव, नीरज हर्ष श्रीवास्तव, जलज श्रीवास्तव, अर्जुन लाल पटेल, जेपी असाटी, रामसिंह ठाकुर, भूपेंद्र तिवारी, गणेश शिवहरे, सुनील उपाध्याय, श्रवण उपाध्याय, श्रीमती विद्या राजपूत, बबलू गर्ग, एवं प्रज्ञपीठ में अनूप श्रीवास्तव लक्ष्मण सिंह राजपूत, अरुण श्रीवास्तव पीएल साहू, दिनेश साहू, श्रीमती जयंती श्रीवास्तव, श्रीमती संगीता राजपूत, अरविंद खरे, दर्शन मिश्रा श्रीमती दुर्गेश मिश्रा, देवेंद्र बोहरे सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

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