
सुप्रीम कोर्ट का “माईल स्टोन” जजमेंट
गोविंद सिंह की पूर्व के सभी मामलों की जमानतें हुई निरस्त
राजेन्द्र पाठक कांड
पाठक परिवार तिहरे हत्याकांड
सतपारा लूट कांड
में था तिहरा आजीवन कारावास आरोपी गोविंद सिंह को
न्यायालय धमकी मामले में तत्कालीन एस पी हेमन्त चौहान के विरुद्ध जज सोनकर साहब की शिकायत हाइकोर्ट दो सप्ताह में करेगा जांच
राजनीतिक रसूखदार और सामान्य व्यक्तियो को सरकार नही अपना सकती दोहरा रवैया सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
दमोह। हटा के बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में पथरिया विधायक को एक बार फिर करारा झटका लगा है। साथ ही मध्य प्रदेश सरकार एवं दमोह के तत्कालीन एसपी पर भी सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए अपना माइलस्टोन जजमेंट सुनाया है।
हटा के बहुचर्चित कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में आज सुप्रीम कोर्ट दिल्ली की डबल बेंच में हुई सुनवाई में एक बार फिर पथरिया से बसपा की दबंग विधायक रामबाई परिहार और उनके पति को करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने आज हुई सुनवाई में हाईकोर्ट से मिली हुई गोविंद परिहार एवं उनके परिजनों की सभी जमानत निरस्त कर दी है। साथ ही मध्य प्रदेश सरकार पर भी तल्ख टिप्पणी की है।
गौरतलब है कि मार्च 2019 में देवेंद्र चौरसिया हत्या कर दी गई थी। जिसमें नामजद आरोपी गोविंद सिंह की पूर्व जमानतों को निरस्त किए जाने एक याचिका देवेन्द्र चौरसिया के पुत्र सोमेश द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी। इसी बीच हटा न्यायालय ने गोविंद सिंह को मामले में आरोपी बनाया था। गोविंद सिंह की गिरफ्तारी की कवायद के दौरान तत्कालीन एस पी हेमंत चौहान पर भी आरोपी पक्ष का बचाव करने एवं हटा न्यायालय को प्रभावित करने के आक्षेप लगे थे। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इन सारे बिंदुओं को उठाया गया। साथ ही आरोपी को सरकार के संरक्षण की बात भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आई थी। मामले में राज्य सरकार व आरोपी पक्ष व याचिकाकर्ता की विस्तृत सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
सभी जमानतें निरस्त
सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय देते हुए लिखा कि आरोपी गोविंद सिंह की राजेन्द्र पाठक हत्याकांड व तिहरे पाठक हत्याकांड व सतपारा लूट कांड की सभी जमानतें जो उच्च न्यायालय जबलपुर ने स्वीकृत की थी उन्हें निरस्त किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि वर्तमान आरोपी ने सरकार की आड़ में अपने प्रभाव का लाभ लेने का प्रयास किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा के सरकार आम आदमी और रसूखदार व्यक्तियों के संबंध में कानून के दोहरे मापदंड नहीं अपना सकती। इस मामले में सरकार अपने संवैधानिक कर्तव्यों से विमुख रही है। सुप्रीम ने आगे कहा के जिला अदालतें न्यायालय स्तर की हमारी प्राथमिक संस्थाएं हैं, और इनके पीठासीन को प्रभावित किया जाना किसी स्तर पर स्वीकार्य नहीं हो सकता।
चीफ जस्टिस करें जांच
प्रदेश सरकार पर तीखी टिप्पणी
माननीय न्यायालय ने अपनी फैसले में लेख किया है कि मध्य प्रदेश सरकार संवैधानिक कर्तव्यों का पालन नहीं कर रही है। सरकार को कानून संगत तरीके से काम करना होगा। हत्याकांड की आरोपी विधायक पति गोविंद सिंह को सरकार द्वारा सुरक्षा मुहैया कराने और सुरक्षा के दौरान ही उसके फरार होने तथा गिरफ्तारी तक सुरक्षा देने के मामले पर भी तीखी टिप्पणी की है।

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