
दमोह। जीएसटी विभाग ने आज जबलपुर नाका स्थित एक फर्म पर छापा मारकर टैक्स चोरी पकड़ी। हालांकि अधिकारियों ने किसी तरह का कोई खुलासा नहीं किया जिससे पूरी कार्यप्रणाली की संदेह के घेरे में आ गई है।
राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग ने आज जबलपुर नाका स्थित शासकीय ठेकेदार दिलीप राय के घर छापा मारकर जीएसटी की चोरी पकड़ी। 3 गाड़ियों में अधिकारी छापा मारने पहुंचे। लेकिन मीडिया के पहुंचते ही उन्होंने जानकारी देने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि दिलीप राय जल संसाधन, आर ई एस सहित विभिन्न विभागों में करोड़ों रुपए के ठेके लेते हैं। विभाग को खबर मिली थी कि रेट, गिट्टी, पत्थर तथा लोहे में बड़े पैमाने पर जीएसटी की चोरी की गई है। सरकार द्वारा निर्माण सामग्री पर करीब 5 प्रतिशत कर वसूला जाता है। पूरे मामले में खास बात यह रही कि जीएसटी के अधिकारी घंटे भर बाद ही कार्रवाई छोड़कर दोपहर भोजन के लिए बस स्टैंड स्थित एक निजी होटल में ठेकेदार के कर्मचारी के साथ पहुंच गए। वहां पर 1 घंटे से अधिक समय तक रहे। जबकि नियमानुसार कार्रवाई के दौरान जहां छापा मारा गया है उस स्थान को नहीं छोड़ सकते हैं। क्या ठेकेदार को दस्तावेज गोलमाल करने का समय देने के लिए ही स्थान छोड़ा गया यह प्रश्न चिन्ह बना हुआ है? सूत्रों कहना है कि ठेकेदार द्वारा डायरेक्ट कंपनी से लोहा खरीद कर उसकी टैक्स चोरी की गई वहीं पत्थर, गिट्टी एवं रेत के पक्के बिल नहीं बनवाए गए जिससे व्यापक कर चोरी की संभावना है।
एक भी कार्रवाई का खुलासा नहीं
गौरतलब है कि जीएसटी लागू होने के बाद पिछले 2 वर्ष में विभाग द्वारा दमोह जिले में करीब 15 से अधिक कार्रवाई को अब तक अंजाम दिया गया है। लेकिन एक भी कार्रवाई में किस फर्म पर कितनी रिकवरी निकली है या कितनी चोरी पकड़ी गई है इसकी जानकारी आज तक उन्होंने मीडिया के समक्ष उजागर नहीं की है। आखिरकार छापे की कार्रवाई को क्यों छुपाया जा रहा है, और इसकी जानकारी क्यों सार्वजनिक नहीं की जाती सवाल बना हुआ है। तो दूसरी ओर अधिकारियों द्वारा अंदर खाने में गोलमाल किया गया होगा इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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