हटा से संजय जैन की रिपोर्ट।
कहते हैं कि नेकी करने के लिए किसी मुहूर्त या इजाज़त की आवश्यकता नहीं होती है। इन कार्यों को करने वाला बड़े दिल वाला होता है। साथ इनका दायरा भी बढा होता है। ऐसा ही कुछ अनोखा और अनुकरणीय कार्य नगर के युवाओं ने कर दिखाया है।
विगत कई वर्षो से अस्पताल परिसर में एक मानसिक विक्षिप्त वृद्ध महिला डेरा डाले हुए थी, जिसका न तो किसी को उसका नाम पता था, न ही उसके घर परिवार के बारे में कोई जानकारी थी। बीते 7 जून को महिला का निधन अस्पताल परिसर में हो गया था। कानूनी औपचारिकाओं के उपरांत नगर पालिका, पुलिस प्रशासन के सहयोग से उसका अंतिम संस्कार गौरीशंकर मंदिर के पास मुक्तिधाम में किया गया।
रविवार को मुक्तिधाम सफाई अभियान सदस्यों के द्वारा सोशल मीडिया पर बताया गया कि चार सप्ताह उपरांत भी श्मसान भूमि में उक्त महिला की अस्थियां बिखरी पडी हुई है। उनका विसर्जन नहीं हो पा रहा है। इस वायरल मैसेज का तत्काल असर हुआ। नगर के युवा आकाश पौराणिक, जगदीश विश्वकर्मा, मनीष कुसमया, मोन्टी रैकवार, दीपक रजक ने इन अस्थियों के विसर्जन का मन बनाया।
विधिपूर्वक किया अस्थिविसर्जन
सोमवार की सुबह युवाओं की टीम अस्थि संचय में उपयोग आने वाली सारी सामग्री को लेकर नगर के मुक्तिधाम पहुंचे जहां उन्होने पूरे विधि विधान से अस्थियों का संचय किया। दाह संस्कार स्थल पर जो औपचारिकताएं परिवार के सदस्यों द्वारा की जाती है उन्हे परमंपरानुसार पूरा किया। इसके उपरांत संचय की गई अस्थियों को सुनार व कोपरा नदी के संगम स्थल मडकोलेश्वर धाम ले गये जहां कर्मकांडी पुरोहित के मार्गदर्शन में अस्थियों का विसर्जन किया।
पितृपक्ष में करेंगे तर्पण
आकाश पौराणिक, जगदीश विश्वकर्मा, मनीष कुसमहा, मोन्टी रैकवार, दीपक रजक ने बताया कि वर्ष 2020 एवं 2021 में जिन लोगों की अकाल या कोरोना से मृत्यु हुई थी, उनका तर्पण कार्यक्रम अगामी पितृ पक्ष में किया जाएगा। युवाओं की टीम पूरे पखवाड़े विधिविधान से यह कार्य करेगी।


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