मार्च 17, 2026

सांसारिक जीवन त्याग दर्पण बने मुनि

दमोह। बिहार के पटना में रहने वाले बाल ब्रह्मचारी दर्पण ने सांसारिक जीवन को अलविदा कहते हुए मुनि दीक्षा धारण कर ली। यह सौभाग्य उन्हें वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के सानिध्य में उन्हीं के कर कमलों से प्राप्त हुआ है। इस सुयोग के साक्षी बने देशभर से आए हुए सैकड़ों श्रावक। आचार्य निर्भय सागर महाराज ने जैनेश्वरी दिगम्बरी मुनि दीक्षा ग्रहण कराई। दीक्षा के बाद मुनि श्री ब्रह्मदत्त सागर नाम करण किया गया।
गौरतलब है कि दमोह में पंचकल्याणक महोत्सव चल रहा है। जिसमें शामिल होने के लिए देश ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में जैन श्रावक आए हुए हैं। इसी मौके पर आचार्य निर्भय सागर जी द्वारा मंगल प्रवचन एवं मुनि दीक्षा संपन्न कराई गई। दीक्षा के पूर्व केश लौंच आचार्य श्री ने किया। बाल ब्रह्मचारी दर्पण का हल्दी तेल, उपटन एवं स्नान के उपरांत शाही पोषाक पहनाई गई। तत्पश्चात वह हाथी पर सवार हो दीक्षा स्थल पहुंचे वहॉ गणधर बलय विधान किया गया।
इनको मिला यह सौभाग्य
विधान के लिए सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य मलैया ट्रैक्टर वालों को प्राप्त हुआ। दीक्षार्थी दर्पण भैया के धर्म के माता पिता बनने का सौभाग्य संतोष कुमार फिरोजाबाद वालों को मिला। 21 श्रावकों ने आचार्य श्री को शास्त्र भेंट किए। दीक्षार्थी को मयूर पंख से बनी नवीन पिच्छी रतलाई डॉक्टर परिवार ने दी। कमंडल दीक्षार्थी के छोटे भाई रतनेश एवं गौरव जैन ने दिया। दीक्षार्थी की बहिन छाया सौरभ जैन इन्दौर कौशलौंच छेलने का सौभाग्य मिला।
मुनि दीक्षा सौभाग्य की बात वैज्ञानिक संत आचार्य निर्भय सागर जी महाराज ने कहा कि राग से विराग की ओर जाना दीक्षा है। असंयम को छोड़कर संयम धारण दीक्षा है। दिगंबरी दीक्षा लेना बच्चों का खेल नहीं। संसार शरीर से विरक्ति होने पर दीक्षा लेने के भाव होते हैं। गुरु के समक्ष शिष्य का समर्पण भाव होना दीक्षा है। बैराग्य जीवन की सबसे बड़ी घटना है।
आचार्यों के चित्रों का अनावरण
इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी, आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी आचार्य श्री विपुल सागर जी महाराज के चित्र अनावरण भी किया गया। अनावरण त्यागी वृति ब्रह्मचारीयों ने किया। अर्थिका सत्यवती एवं सकल मति माताजी ने ससंघ उपस्तिथि में मंगल प्रवचन भी दिए। आचार्य श्री ने दीक्षा के पूर्व दीक्षार्थी के परिजनों रिश्तेदारों एवं उपस्थित जनसमुदाय एवं संघस्थ साधुओ से दीक्षा देने की अनुमति मांगी सब ने सहर्ष अनुमति दी।
**देश भर से आए भक्त **
इस अवसर पर अजमेर, दिल्ली, इन्दौर, भोपाल, सागर, जबलपुर, छतरपुर, बण्डा, रतलाई, टीकमगढ़, झालवाड़ा, बरहन, आगरा, मैनपुरी, मेरठ, भिंड, मुरैना, पटना बिहार, हिम्मत नगर गुजरात, कटनी, मुंबई, जयपुर, शहडोल, बरा नरसिंहपुर इत्यादि अनेक स्थानों से हजारों की संख्या में आए लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन मुनि श्री शिवदत्त सागर प्रतिष्ठाचार्य आशीष अभिषेक जैन ने किया.

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