
दमोह. एक ही रात में चोरों ने तीन जगह ताले तोड़ दिए. चोर एक कार पर सवार होकर आए, उन्होंने माल पर हाथ साफ किया और चले गए. लेकिन चंद कदमों पर दूर तैनात पुलिस को यह सब नहीं दिखा.
अपराधियों को पुलिस का कितना खौफ है इसकी बानगी दमोह जिले में देखने मिल सकती है. चोरों को पुलिस कार्रवाई की जरा भी परवाह नहीं है. छुरा चाकू की घटनाएं तो आम हैं ही, साथ ही चोरी की घटनाएं भी बेखौफ हो रही हैं. ताजा मामला नगर के सराफा और मछली बाजार में देखा जा सकता है. बीती रात्रि एक कार पर सवार तीन से चार चोर सराफा बाजार पहुंचे और उन्होंने बेखौफ गुरु कृपा ज्वैलर्स से बड़ी संख्या में चांदी के आभूषणों पर हाथ साफ कर दिया. वह गाड़ी में बैठे और फुर्र हो गए. तो वहीं इस घटना से चंद कदम की दूरी पर मछली बाजार में भी चोरों ने रवि किराना का ताला तोड़कर शटर उठाई और गले में रखे रुपए लेकर फरार हो गए. तीसरी घटना को अंजाम देने वह तोता ब्रांड के ओनर सत्यानंद सिंधी की दुकान पर पहुंचे. उन्होंने शटर तो तोड़ दी लेकिन अंदर चैनल गेट होने के कारण वह चोरी नहीं कर सके. कुछ देर बाद जब पुलिस को भनक लगी तो उन्होंने मौका स्थल पर पहुंचकर तुरंत ही किसी तरह ज्वेलरी शॉप के मालिक को घर पर खबर भिजवाई. बताया जाता है कि चोरों ने चांदी की पायल, लच्छा, करधनी, चूड़ी, बिछिया सहित अन्य जेवरात सहित करीब दो से ढाई किलो की चांदी पर हाथ साफ कर दिया. हालांकि पुलिस ने केवल सवा किलो करीब चांदी चोरी होने की ही पुष्टि की है. हैरानी की बात यह है कि 2 दिन पूर्व ही पुलिस कसाई मंडी पहुंची थी और वहां से एक कसाई के कब्जे से पुलिस अभी रक्षा में गाय लेकर कोतवाली पहुंची और वहां से उसे उसके मालिक के सुपर्द किया था. दूसरा पहलू यह भी है घंटाघर और टॉकीज तिराहा पर पुलिस पॉइंट है. रात में अधिकारी भी गश्त पर निकलते हैं. जिस जगह यह घटना हुई वहां से कोतवाली की दूरी महज आधा किलोमीटर भी नहीं होगी. लेकिन चोरों ने बेखौफ इस तरह से चोरी की वारदात को अंजाम दिया जैसे वह पुलिस के साए में ही चोरी करने के लिए आए हों. जब रात के सन्नाटे में शटर खोला जा रहा था उसे समय पॉइंट पर तैनात पुलिस कर्मियों को क्या इसकी आवाज नहीं आई होगी ? हालांकि सीएसपी अभिषेक तिवारी का कहना है की सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से चोरों की शिनाख्त की जा रही है.I मुखबिर के द्वारा वह किस तरफ गए हैं यह भी जानकारी हासिल की जा रही है. शीघ्र ही चोरों को गिरफ्तार किया जाएगा. दमोह पुलिस की यह पुरानी प्रथा है कि सांप निकल जाने के बाद वह लकीर को पीटती है. जिन पुलिस कर्मियों की उस पॉइंट पर ड्यूटी थी उन पर क्या कार्रवाई की जाएगी ? इस बात का खुलासा भी पुलिस अधिकारियों ने नहीं किया है. आए दिन चाकू बाजी की घटनाएं इस तरह से हो रही है जैसे कि दमोह में पुलिस की स्थिति पूरी तरह नगण्य हो यह बात अलग है कि बाद में आरोपियों को हिरासत में ले लिया जाता है. लेकिन पुलिस की यह बेखौफ छवि अपराधियों में कैसी और क्यों बन रही है इस पर भी पुलिस को गौर करना चाहिए. पुलिस अधिकारी हर बार वही घिसा पिटा पुराना बयान देते हैं, कि हम कार्रवाई कर रहे हैं और आरोपियों को शीघ्र पकड़ लेंगे. लेकिन कभी भी यह नहीं कहते कि हम ऐसी व्यवस्था बनाएंगे की अपराधी वारदात को अंजाम देने से पहले 10 बार सोचें.


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