मार्च 17, 2026

अपनी ही पार्टी में एक बार फिर उपेक्षित हो गए पूर्व वित्त मंत्री मलैया

दमोह। पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के प्रति भाजपा की रार कम होने का नाम नहीं ले रही है। कल होने वाली बैठक में एक बार फिर मलैया को पार्टी ने दरकिनार कर दिया है।
भाजपा के कद्दावर नेता जयंत मलैया 2018 का विधानसभा चुनाव क्या हारे अपनी ही पार्टी से लगातार उपेक्षित हो रहे हैं। जो पार्टी और उसके नेता जिन मलैया की गुणगान करते नहीं थकते थे अब वही लोग उन्हें देखना भी पसंद नहीं कर रहे हैं। आखिर ऐसी भी क्या वजह या नाराजगी है कि अपनी ही पार्टी से लगातार उपेक्षित हो रहे हैं? उनकी वरिष्ठता को भी ध्यान में नहीं रखा जा रहा है।
फ्लेक्स से मलैया गायब
कल 5 अगस्त को नवगठित जिला कार्यकारिणी की बैठक पार्टी कार्यालय में बैठक होना है। पार्टी कार्यालय में एक बड़ा सा फ्लेक्स लगाया गया है। जिसमें प्रधानमंत्री, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री, दोनों विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष और राहुल सिंह की भी फोटो लगाई गई है। दमोह जिले के प्रभारी अविनाश पांडे और भाजपा अध्यक्ष प्रीतम सिंह लोधी का फोटो भी फ्लेक्स में लगा हुआ है, लेकिन उसमें जयंत मलैया की कहीं फोटो तक नहीं है।
अध्यक्ष बोले, पदाधिकारी नहीं हैं मलैया
जिला कार्यालय में आज आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा अध्यक्ष से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि फ्लेक्स में पार्टी पदाधिकारियों की तस्वीरें हैं लेकिन मलैया किसी पद पर नहीं है इसलिए उनका फोटो नहीं है। यही जबाव उनका नगर पालिका की निवर्तमान अध्यक्ष मालती असाटी के संदर्भ में भी था। लेकिन यहां गौर करने वाली बात है कि जिला पंचायत के निवर्तमान अध्यक्ष शिवचरण पटेल भी पदाधिकारी नहीं है। ऐसे में उनका फोटो फ्लेक्स में किस आधार पर लगाया गया है। मालूम हो कि चुनाव हारने के बाद लगातार मलैया और उनके समर्थकों को उपेक्षित किया जा रहा है इसके पूर्व भी जब विधानसभा का उपचुनाव था उस समय भी कई अवसरों पर जानबूझकर श्री मलैया की अनदेखी की गई और इसी का नतीजा रहा कि लोगों ने उपचुनाव में भाजपा को आईना दिखा दिया। अब एक बार फिर उसी पद चिन्ह पर पार्टी चलती नजर आ रही है ऐसे में कहा जा सकता है कि भाजपा ने जमकर गुटबाजी चल रही है। मतलब साफ है जिसकी सल्तनत है संगठन भी उसी की सुनेगा और जिसकी सत्ता में कोई भागीदारी नहीं है संगठन उसे यूं ही दरकिनार करता रहेगा। निकट भविष्य में नगरीय निकाय के चुनाव हो सकते हैं ऐसे में मलेरिया की अनदेखी कहीं भाजपा को भारी न पड़ जाए क्योंकि 35 साल तक लगातार विधायक रहने वाली मलैया की एक एक मोहल्ले, एक एक वार्ड में गहरी पकड़ है। और ऐसे में उनकी उपेक्षा कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।

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