मार्च 17, 2026

रजिस्ट्री के बदले रुपए मांगना सब रजिस्टार को पड़ा महंगा, 5 साल की सजा

दमोह। विशेष न्यायालय ने 20 हजार की रिश्वत मांगने वाले सब रजिस्ट्रार को 5 वर्ष की सजा एवं 20 हज़ार रुपए के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। मामला हटा के पंजीयन विभाग का है।
मामले के संबंध में गौर तलब है कि फरियादी अकरम खान ने नवोदय वार्ड हटा में लगभग 22000 वर्ग फुट कृषि भूमि जो ₹100000 में खरीदने का सौदा किया था। जिसकी रजिस्ट्री होना शेष थी| रजिस्ट्री के कार्य के लिए सब- रजिस्ट्रार जगदीश प्रसाद सोनी पुत्र लक्ष्मी नारायण सोनी उम्र 59 वर्ष ने फरियादी से वैध पारिश्रमिक से भिन्न 20 हज़ार की रिश्वत की मांगी की थी| 20 हज़ार की मांग में से 8 हज़ार रुपए में सहमति बन गई। उक्त मांग की राशि को दिनांक 25.04.2014 को आरोपी ने फरियादी से देने को कहा| फरियादी अकरम आरोपी सब रजिस्ट्रार को रिश्वत नहीं देना चाहता था। इसलिए उसने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर में एक लिखित आवेदन पेश किया। जिस पर से पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर ने दिनांक 25.04.14 को ट्रैप दल हटा पहुंचाकर उप पंजीयक कार्यालय ऑफिस में कार्रवाई के दौरान आरोपी जगदीश प्रसाद सोनी( सब रजिस्ट्रार ) को 8 हज़ार की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया| अभियुक्त के हाथों को धुलवाए जाने पर घोल का रंग गुलाबी हो गया और रिश्वत राशि के नोट अभियुक्त के पास मिले थे | अभिलेख पर आई साक्ष्य एवं अभियोजन के तर्कों से सहमत होकर माननीय न्यायालय ने अभियुक्त को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हज़ार अर्थदंड, एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (1) डी सहपठित धारा 13 (2) भादंसं मे 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 20 हज़ार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया| अभियोजन की ओर से प्रकरण में पैरवी और लिखित और मौखिक तर्क हेमंत कुमार पांडे, एडीपीओ द्वारा किए गए।

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