
हटा से संजय जैन। नगर के आदिनाथ त्रमूर्ति दिगम्बर जैन मंदिर में श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान में मंगल प्रवचनों की अमृत धारा बरस रही है। जिसमें भीगकर भक्तगण धर्म लाभ ले रहे हैं।
नगर में चल रहे महामंडल विधान के पुण्यार्जक हेमकुमार, शीला जैन के द्वारा ध्वजारोहण से विधान प्रारंभ हुआ। आर्यिका संघ के सानिध्य में हो रहे विधान में संगीतमय पूजन के साथ भक्तजन सिद्धों की आराधना कर रहे हैं। विधान में आर्यिका श्री गुणमती माता जी ने अपने मंगलाशीष देते हुए कहा कि यहां हम आपको सिखाने के लिए नहीं बल्कि जाग्रत करने आए हैं। दुनिया हाईटेक हो गई है। अब बच्चों को मंदिर जाने की आज्ञा देने से कुछ नहीं होगा। उन्हें बताना होगा कि मंदिर क्यों जाते हैं। मंदिर जाने के कारण व महत्व यदि नहीं बताओगे तो वह केवल माथा टेक कर भाग आएगा। जो लोग यह कहते है कि मंदिर दूर है तो समझना नर्क उनके बहुत पास है। आर्यिका श्री ने कहा कि मंदिर के गर्भगृह में वही प्रवेश करें जो आचार, विचार, द्रव्य व वस्त्रों से शुद्ध हो। शुद्धता की तरंगे मूर्ति तक जाएं व मूर्ति से निकलने वाली पवित्र भावना वाली तरंगें श्रावक ग्रहण करे। अशुद्धता से मूर्ति को छूने पर उसका प्रभाव चमत्कार कम होता है। मूर्ति डिस्चार्ज होती है। मंदिरों में मानस्तंभ बनाए जाते हैं। जब कोई अशुभ विचारों वाला व्यक्ति वहां आता है तो उसे वहीं से प्रभु के दर्शन मिल जाएं साथ ही उसकी अशुभ तरंगे मूर्ति को प्रभावित न कर पाएं, लेकिन मूर्ति से निकलने वाली पवित्र तरंगे उसे जरूर प्रभावित करें। मूर्ति का पूरा लाभ उसे मिल जाए। आर्यिका श्री ने कहा कि संतों का कोई पता ठिकाना नहीं रहता लेकिन बात ठिकाना की करते हैं।
विधान का सुचारू रूप से संचालन विधानचार्य पं. अंकित शास्त्री, पं. प्रवीन, आदित्य भैया द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर श्रद्धालु भी भक्तिभाव के साथ अपनी सहभागिता दर्ज करा रहे हैं।

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