मार्च 19, 2026

अतिक्रमण हटाने पहुंचे वन अमले को कुचबंधिया समाज ने खदेड़ा

दमोह। परशुराम टेकरी के पीछे अतिक्रमण हटाने पहुंचे राजस्व और वन अमले पर कुचबंदिया समाज के लोगों ने आज हमला कर दिया। डिप्टी रेंजर सहित 3 लोग घायल हो गए। अमले को किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाना पड़ी। घटना की बात कुचबंधिया समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर भी जमकर हंगामा किया।
पॉलिटेक्निक कॉलेज के पीछे और परशुराम टेकरी से लगी हुई वन भूमि पर वर्षों से काबिज कुचबंधिया समाज के लोगों का अतिक्रमण हटाने पहुंचे वन विभाग और राजस्व हमले को आज भारी विरोध का सामना करना पड़ा। वहीं उत्तेजित लोगों ने वन एवं राजस्व टीम पर हमला कर दिया। किसी तरह प्रशासनिक अमले को वहां से भाग कर अपनी जान बचाना पड़ी। हालांकि बाद में बड़ी संख्या में वन कर्मी और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और उसके बाद अतिक्रमण से हटाए गए माल को बरामद किया। हालांकि इसके पूर्व ही उत्तेजित लोगों ने वन विभाग की एक बाइक एवं माल ले जाने के लिए लगाए गए एक ट्रैक्टर में तोड़फोड़ कर दी। पटना में दो ट्रैक्टर चालक एवं डिप्टी रेंजर सहित तीन लोग घायल हो गए।
क्या था मामला
दरअसल कॉलेज के पीछे करीब एक हजार परिवार निवास करते हैं। जिसमें कुचबंधिया समाज के लोग भी शामिल है। आज जब तहसीलदार बबीता राठौर एवं रेंजर महिपाल सिंह के नेतृत्व में टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची तो वहां की महिलाओ और पुरुषों ने लाठी एवं हंसिया आदि से टीम पर हमला कर दिया। घटना में डिप्टी रेंजर तनवीर अहमद, ट्रैक्टर चालक गोविंद पुत्र बाबूलाल पटेल तथा चैना पुत्र कंछेदी अहिरवार घायल हो गए।
घायल गोविंद पटेल ने बताया कि वह अतिक्रमण का सामान उठाने टीम के साथ गया था। लेकिन 15-20 लोगों ने घेर कर उसके साथ मारपीट कर दी। भाई लोग लाठी और हंसिया आदि लिए हुए थे। वह किसी तरह वहां से जान बचाकर भागा बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पत्थर और लाठी से हमला
रेंजर महिपाल सिंह ने बताया कि कुछ बलिया समाज के लोग वहां पर अवैध अतिक्रमण किए हुए हैं उसे हटाने के लिए वह गए हुए थे लेकिन लोगों ने उन पर अचानक पत्थर बरसाए एवं लाठियों से हमला कर दिया। उन्होंने कुचबंधिया समाज के उस आरोप को भी निराधार बताया जिसमें पुलिस द्वारा महिलाओं के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।
पुलिस ने हमे मारा
वन अधिकारी से इतर बस्ती में रहने वाली सरोज कुचबंधिया ने बताया कि वह कई पीढ़ियों से उस जगह पर रहती आ रही है। दमोह से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में वह केस जीत चुकी हैं। लेकिन पुलिस वाले और सरकारी कर्मचारी जबरन उनके मकान तोड़ने पहुंच जाते हैं। पक्के बने बनाए पक्के मकान तोड़ दिए गए। जो घास फूस और पन्नी से झोपड़ी बनाई गई थी उनको भी ध्वस्त कर दिया गया। अब हम ऐसी में कहां जाएं। जबकि बारिश का मौसम शुरू हो चुका है। विरोध करने पर पुलिस वाले महिलाओं के साथ मारपीट भी करते हैं। 4-5 मकान तोड़ दिए गए हैं।
कलेक्ट्रेट में हंगामा
अतिक्रमण हटाए जाने के बाद कुचबंधिया समाज के दर्जनों महिलाएं और पुरुष कलेक्ट्रेट पहुंच गए। वहां पर उन्होंने जमकर हंगामा किया और वहीं धरने पर बैठ गए। उसके बाद उन्होंने कलेक्टर कक्ष में भी घुसने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने उन्हें किसी तरह समझाईश देकर वापस नीचे भेजा दिया। उन्होंने अपनी समस्याओं से संबंधित एक ज्ञापन एडीएम नाथूराम गौंड को दिया।

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