
दमोह। हटा में एक परिवार ने अपनी गाय की मृत्यु पर उसकी अंतिम यात्रा बैंड बाजे की धुन पर निकाली। उसका अंतिम संस्कार भी इंसानों की तरह किया गया।
कहते हैं कभी-कभी अपने खराब व्यवहार के कारण इंसान भी पराया हो जाता है, जबकि कभी कभी मूक पशु भी परिवार के सदस्य से भी ज्यादा खास बन जाते हैं। ऐसा ही ताजा मामला जिले की हटा तहसील से सामने आया है जहां एक गाय की मृत्यु पर द्रवित परिजनों ने उसकी अंतिम यात्रा न केवल बैंड बाजों की धुन पर निकाली बल्कि उसका अंतिम संस्कार भी किसी इंसान की तरह ही किया। घर के सदस्य के रूप में शामिल बेजुबान गौ वंश की अकस्मात मृत्यु पर उसे सम्मान से अपने घर से विदा करने आयोजित की गई एक गाय की अंतिम यात्रा नगर में देखने मिली। एक ऑटो रिक्शा में गाय के पार्थिव शरीर को रखा गया। इंसानों की तरह उसे लाल कपड़ा ओढ़ाया गया। अंतिम यात्रा में शामिल गौ भक्त, जय गौ माता जय गोपाल के नारे लगाते हुए चल रहे थे। इस अंतिम यात्रा के दृश्य को जिसने भी देखा एक पल के लिए अचंभित रह गया।
हटा नगर के कोऑपरेटिव बैंक के समीप रहने वाले सुधीर सोनी के यहां 13 वर्ष से पली यह गौरी नाम की गाय अत्यंत सीधी थी। वह बहुत सीधी और सबकी दुलारी थी। तीन दिन पहले अपने निर्धारित मार्ग पर घूमने के दौरान उसके द्वारा कहीं जहरीले अनाज का सेवन कर लिए जाने से इलाजरत गौरी की मृत्यु हो गई।
सुरभि गौ सेवा समिति की सेवा भावना से प्रभावित इस परिवार के नगरपालिका के माध्यम से उसे अपने घर से न उठवाते हुए स्वयं उसे ससम्मान विदा करने का फैसला लिया। घर से उसे ले जाने के पूर्व उसका पूजन किया गया एवं मुक्ति धाम में खोदे गए गडढ़े में गौ सेवकों की उपस्थिति में उसे विधि विधान से दफनाया गया। गाय के पालक सुधीर सोनी ने बताया कि 2 दिन पहले चरने गई थी। वहां किसी जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसका इलाज करवा रहे थे। लेकिन सुबह उसकी मृत्यु हो गई। जिसके बाद उसका रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

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