मार्च 19, 2026

आंगनबाड़ी संघ का आंदोलन कैसे बन रहा कैंसर पीड़िता के सहारा

दमोह। अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन एक कैंसर पीड़ित के लिए संबल साबित हो रहा है। यह महिला कोई और नहीं बल्कि इन्हीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में से एक है।
मात्र दो हजार रुपए के मासिक मानदेय पर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाली जिले की सैकड़ों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पिछले 6 दिनों से कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने धरने पर बैठी हैं। उनकी सरकार से कुछ मांगे हैं। जिसको लेकर वह काफी मुखर हैं। लेकिन इस मुखरता की बीच उनका एक मार्मिक चेहरा भी देखने मिल रहा है। दरअसल पथरिया ब्लाक के पीपर खिरिया गांव में कल्पना श्रीवास्तव आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर पदस्थ हैं, और वह इन दिनों जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं। कल्पना को पिछले कुछ महीनों से सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी का कैंसर) की शिकायत है। उन्होंने अपना पहला ऑपरेशन जबलपुर में कराया था। डॉक्टर ने बच्चादानी तो निकाल दी लेकिन उसके बाद कैंसर बहुत तेजी से फैलने लगा। दूसरी बार फिर से डॉक्टर्स ने ऑपरेशन किया लेकिन सफलता नहीं मिली। तीसरी बार उन्होंने अपना ऑपरेशन दिल्ली की एक बड़ी अस्पताल में कराया। लेकिन कैंसर ठीक होने की बजाय नासूर बनकर लगातार शरीर में फैलता गया। अब स्थिति यह है की पेट के अधिकांश हिस्से में कैंसर फैल चुका है। डॉक्टर ने चौथी बार ऑपरेशन का परामर्श दिया है। लेकिन पहली तीन ऑपरेशन में अपनी जमा पूंजी गंवा चुकी कल्पना के पास इतना पैसा नहीं है कि वह ऑपरेशन करा सकें। इस बात की जानकारी जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संघ को लगी तो उन्होंने अपनी बचत में से कल्पना के इलाज के लिए राशि जुटाना शुरू कर दिया। हड़ताल के बीच वह आने वाले आगंतुकों व अन्य संगठनों से बार-बार यही अपील करती हैं कि उनकी साथी की जान बचाने के लिए सामने रखी गुल्लक में जो भी संभव हो वह राशि दान स्वरूप डाल दें। इस मार्मिक अपील का लोगों पर असर भी हो रहा है गुल्लक में हर आने वाला व्यक्ति पैसा जरूर डालता है।
परिवार का कोई सहारा नहीं
कैंसर पीड़ित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कल्पना की माली हालत ठीक नहीं है उनके पति टैक्सी ड्राइवर है दो बेटियां हैं जिसमें से बड़ी बेटी करीब 21 साल की है और वह शादी के लिए तैयार बैठी है लेकिन मां की बीमारी के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है दूसरी बेटी अभी अध्ययनरत है लेकिन वह भी पढ़ाई नहीं कर पा रही है ताज्जुब की बात यह है कि अभी तक शासन की ओर से भी कोई सहयोग नहीं मिला है।
आंगनवाड़ी संघ की जिला अध्यक्ष श्रीमती शोभा तिवारी कहती हैं कि एक आंगनवाड़ी बहन कैंसर पीड़ित है। उनकी दो बच्चियां हैं। परिवार में कोई और नहीं है। उनका चौथा ऑपरेशन दिल्ली में होना है। इसी के लिए यह गुल्लक यहां पर रखी गई है। लोग आ रहे हैं और अपनी स्वेच्छा से राशि उसमें दान करते हैं। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से अभी कोई मदद नहीं मिली है।

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