
दमोह. रविवार को एक भाजपा नेता के घर में घुसकर मारपीट करने और बलात मकान पर कब्जा करने के प्रयास के मामले में आज ब्राह्मण समाज ने चक्का जाम कर अपना विरोध प्रकट किया एवं पुलिस अधीक्षक के नाम एक ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की.
दमोह में पुलिस की अकर्मण्यता एवं लचर कार्य प्रणाली के कारण सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है. आए दिन चाकू बाजी, लूटपाट और मर्डर, लूटपाट की घटनाएं तो हो ही रही हैं, लेकिन अब शहर में दिनदहाड़े बलात भूमि जिहाद भी होने लगा है. जी हां रविवार की दोपहर स्थानीय टंडन बगीचा निवासी भाजपा नेता चंद्रशेखर उपाध्याय जब अपने घर पर थे. उसी समय टंडन पेट्रोल पंप पर काम करने वाले कासिम खान और उसके 8 -10 सहयोगी पहुंचे और मकान में घुसकर जबरन समान में तोड़फोड़ की. परिजनों के साथ मारपीट की तथा मकान खाली करने के लिए धमकाया. काफी देर तक यह घटनाक्रम चलता रहा. लेकिन इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दी. जिसके बाद डायल 112 मौके पर पहुंच गई. लेकिन कुछ ही देर बाद डायल 112 के जाते ही आरोपियों ने फिर से घर में सामान फेंकना और लोगों के साथ मारपीट के क्रम को दोहराया. इसके बाद श्री उपाध्याय अपने परिजनों एवं कुछ अन्य लोगों के साथ जब दमोह कोतवाली प्रकरण दर्ज कराने पहुंचे तो देर रात तक पुलिस ने प्रकरण दर्ज नहीं किया. हालांकि दो आरोपितों को उन्होंने हिरासत में तो लिया. लेकिन कोई मामला दर्ज नहीं किया. इस घटना से गुस्साए ब्राह्मण एवं हिन्दू संगठन के लोगों ने आज शाम एसपी ऑफिस के सामने चक्का जाम कर दिया. इसके बाद पुलिस ने उन्हें प्राथमिकी दर्ज करने का आश्वासन दिया.
जब ब्राह्मण समाज एवं हिंदू संगठन के लोग कोतवाली में प्रकरण दर्ज कराने पहुंचे उसी दौरान घटना में मारपीट करने वाली दो आरोपित भी वहीं पर खड़े हुए थे. जिन्हें पुलिस ने हिरासत में नहीं लिया. लेकिन जैसे ही लोगों की नजर उन पर पड़ी तो वहीं पर उनके साथ जमकर मारपीट कर दी. हालांकि पुलिस ने उन्हें बचा लिया. बताया जाता है कि श्री उपाध्याय के मकान का मामला सिविल कोर्ट में चल रहा है. लेकिन पेट्रोल पंप संचालक जबरन उस मकान पर कब्जा करना चाह रहे हैं. इसी बात को लेकर के यह विवाद हुआ है. एक अन्य कारण यह भी बताया जा रहा है कि सीता नगर बड़ी शाला में हुए करोड़ों रुपए की आर्थिक गड़बड़ी के मामले की शिकायत श्री उपाध्याय ने जिला, पुलिस प्रशासन सहित उच्च जांच एजेंसियों से की है. जिससे बौखला कर उन्हें धमकी भी दी गई कि वह शिकायत को वापस ले ले. लेकिन जब उन्होंने शिकायत वापस नहीं ली तो इस तरह की घटनाक्रम को खुलेआम दिनदहाड़े अंजाम दिया गया.
किसी भी मामले में पुलिस प्रशासन तत्काल कार्रवाई नहीं करता है. इसी का परिणाम है कि वह बाद में बड़ा भयानक रूप ले लेते हैं. बांसा ट्रिपल हत्याकांड इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. जहां पर पिछले वर्ष तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी. जिनमें से एक सागर नाका चौकी में पदस्थ होमगार्ड का सिपाही भी शामिल था. उक्त सिपाही ने पुलिस अधीक्षक को कुछ समय पूर्व ही एक ज्ञापन दिया था कि उनके साथ कोई अनहोनी हो सकती है और उसकी तथा परिवार की जान को खतरा है. लेकिन पुलिस प्रशासन ने उस मामले को हल्के में लिया और एक सप्ताह में ही तीन लोगों की निर्ममता से हत्या कर दी गई. इस घटना से भी पुलिस ने कोई सबक नहीं लिया. उपाध्याय परिवार का कहना है कि उन्हें सुरक्षा की आवश्यकता है क्योंकि जिस तरह से उनके साथ घटनाक्रम हुआ है आगे चलकर कोई बड़ी अनहोनी भी हो सकती है.

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