मार्च 17, 2026

न्यायालय परिसर में गूंजी किलकारी पति से मिलने पहुंची थी गर्भवती महिला

दमोह. जेल में बंद एक पति की पेशी के दौरान उससे मिलने न्यायालय पहुंची महिला ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है. महिला को तत्काल ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया यहां जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. कहते हैं की जन्म और मृत्यु का कोई भरोसा नहीं है कि कब कहां आ जाए. किसी का जन्म और उसकी मृत्यु कहां होना है यह सब पूर्व से सुनिश्चित है. ऐसा ही ताजा मामला दमोह जिला न्यायालय से निकलकर सामने आया है. यहां पर अपने पति से मिलने पहुंची एक महिला ने न्यायालय परिसर में ही एक बच्चे को जन्म दिया है. दरअसल आज मंगलवार दोपहर को एक गर्भवती महिला अपने पति से मिलने न्यायालय परिसर पहुंची थी. पति की पेशी थी उसी दौरान महिला उसका इंतजार कर रही थी. लेकिन अत्यधिक प्रसव कीड़ा होने के कारण वह अस्पताल नहीं जा पाई और दर्द से कराहने लगी. प्रसव के दौरान उसकी जेठानी भी साथ में थी. जैसे ही महिला अधिवक्ताओं को इस घटना की जानकारी हुई तो वह तुरंत ही मौके पर पहुंच गई और परिसर में ही बाड़ाबंदी करके महिला का सुरक्षित प्रसव कराया. इसके तुरंत बाद एंबुलेंस को सूचना दी गई तथा एंबुलेंस आने पर महिला और उसके बच्चे को तुरंत अस्पताल भेज कर दाखिल कराया गया. जहां पर उसका उपचार चल रहा है. बताया जाता है कि शहर के सिविल वार्ड तीन निवासी 30 वर्षीय महिला सपना वंशकार का पति कैलाश वंशकार पिछले 3 महीने से चोरी के मामले में जेल में बंद है. आज उसकी पेशी थी और महिला गर्भावस्था में ही उससे मिलने न्यायालय पहुंची थी. वह पति से मिलने इंतजार कर रही थी तभी अधिक प्रसव पीड़ा होने पर उसने न्यायालय परिसर में ही नवजात शिशु को जन्म दे दिया. सपना वंशकार की जेठानी रजनी वंशकार ने बताया कि उसकी देवरानी का यह चौथा बच्चा है. उसके दो बेटे और दो बेटियां हैं. वह अब इसे वह बड़ा होकर वकील बनाएगी. उसका देवर जेल में बंद हैं. उसी से मिलने देवरानी न्यायालय आई थी और वहीं पर बच्चे का जन्म हो गया. महिला और उसके नवजात शिशु का इलाज डाक्टरों द्वारा किया जा रहा है. प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ता आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि न्यायालय में पहली बार कोई ऐसी घटना हुई है कि किसी गर्भवती महिला ने शिशु को जन्म दिया है. जैसे ही उन्होंने यह घटना देखी तो तत्काल महिला अधिवक्ताओं के द्वारा एक सुरक्षा घेरा बनाया गया और इसके बाद महिला को सुरक्षित तरीके से एंबुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल भेजा गया है. उन्होंने कहा यह न्याय का मंदिर है और आज यहां पहली बार किसी बच्चे की किलकारी गूंजी है.

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