
दमोह. धर्मांतरण के मामले में विवाद झेल रहे लाल बंधु और ईसाई मिशनरी एक बार फिर सरकार के निशाने पर आ गए हैं. इस बार मामला अवैध अतिक्रमण से जुड़ा हुआ है. भारी पुलिस व्यवस्था के बीच राजस्व विभाग ने अतिक्रमण तोड़कर खेल मैदान को मुक्त कराया तो वहीं बड़ी संख्या में ईसाई समाज के लोग मौजूद थे. जिससे तनाव की स्थिति भी निर्मित होती दिखी.
हिंदू संगठनों और सरकार के निशाने पर लगातार चल रहे ईसाई मिशनरी और दमोह के लाल बंधु धर्मांतरण जैसे मामलों में तो फंसे हुए हैं ही, लेकिन अब वह जमीन पर अवैध अतिक्रमण के मामले में भी फसते दिख रहे हैं. दरअसल किल्लाई नाका स्थित राजस्व विभाग की जमीन पर लंबे समय से बाउंड्री बनी हुई है. यह जमीन 15000 स्क्वायर फीट से अधिक है. बीच शहर में होने के कारण इस जमीन का मूल्य भी कई करोड़ रुपए में आंका गया है. इसी को लेकर की लगातार हिंदू संगठन ईसाई मिशनरी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, तथा उन्होंने अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार ज्ञापन भी सौंपा. इस बीच बाल संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंका कानून को ने भी ट्वीट कर अतिक्रमण को हटाने के निर्देश प्रशासनिक अधिकारियों को दिए थे. इसके बाद दो दिन पूर्व राजस्व विभाग की टीम मौके पर जमीन का सीमांकन करने पहुंची. लेकिन ईसाई मिशनरी ने किए गए सीमांकन को गलत बताया गया और उस सीमांकन को मानने से इन्कार कर दिया. लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की कैबिनेट बैठक होने के तीसरी ही दिन आज भारी पुलिस बल के साथ राजस्व के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने अतिक्रमण करके बनाई गई बाउंड्री वाल को तोड़ना शुरू कर दिया. जैसे ही जानकारी ईसाई समाज की लोगों को मिली तो महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी मानव संख्या बनाकर अतिक्रमण तोड़ने का विरोध करने लगे. जिन्हें पुलिस ने हटाया. इस बात को लेकर समाज और विभाग के अधिकारियों के बीच काफी देर तक तर्क वितर्क और विरोध का दौर चलता रहा. लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी नहीं माने और उन्होंने अतिक्रमण तोड़ दिया. इससे समाज के युवक भी नाराज हो गए है. लेकिन पुलिस की मौजूदगी में मामला बिगड़ नहीं पाया.
क्या है मामला
दर असल इसी महीने की 4 तारीख को तहसीलदार ने एक आदेश पारित किया था. जिसमें कहा गया था कि सिविल वार्ड नंबर 5 क्रिश्चियन कॉलोनी में स्थित डिसाइल्स ऑफ़ क्राइस्ट चर्च द्वारा बच्चों के खेल मैदान पर अतिक्रमण किया गया है. उसे तोड़ने की कार्रवाई के लिए पुलिस को पत्र लिखकर पुलिस बल मांगा गया था. इसी आदेश के चलते आज चर्च की बाउंड्री वॉल तोड़कर अतिक्रमण हटाया गया.

जिन्हें विरोध करना है करें
इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी दमोह आरएल बागरी का कहना है कि न्यायालय तहसीलदार ने धारा 248 के तहत अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया था. इस आदेश का पुलिस बल के साथ पालन किया जा रहा है. जिन्हें विरोध करना है. वह अपना विरोध करें. हम अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम वीडियो रिकॉर्डिंग देखेंगे यदि शासकीय कार्य में बाधा डालने का काम किया गया होगा तो ऐसे लोगों को विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया जाएगा. इस जमीन की सुरक्षा के लिए उच्च अधिकारियों से बात करेंगे.
हमारी बात नहीं सुनी
वही इस मामले में चर्च के सचिव नवीन लाल का कहना है कि प्रशासन ने भेदभाव पूर्ण कार्रवाई की है. पहले जो सीमांकन किया गया था उसके पेपर हमारे पास है. अभी जो सीमांकन किया गया है उसमें करीब 15000 स्क्वायर फीट जमीन बताई गई है. जबकि पहले यह जमीन 11000 स्क्वायर फीट बताई जा रही थी. हम तहसीलदार के सीमांकन से संतुष्ट नहीं हैं. तहसीलदार ने पक्षपात पूर्ण कार्रवाई की है. हम इसके विरोध में कोर्ट गए हैं. हमने निवेदन किया था कि इस कार्रवाई को रोका जाए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है. सुबह 6:00 से दलबल के साथ प्रशासन आ गया हमारी बात नहीं सुनी गई और हमारी बाउंड्री को पूरा तहस-नहस कर दिया गया.आज भी हमने तहसीलदार से कार्रवाई रोकने और पुनः सीमांकन करने की मांग की लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी. हमने कोर्ट में कल याचिका लगाई थी जिसकी आज सुनवाई है.

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