
अनोखे अंदाज में निकाली गई अंतिम यात्रा
बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों की ताल पर बारात जैसे माहौल में हुई अंतिम विदाई
दमोह. अंतिम विदाई तो लोगों ने बहुत देखी होंगी. लेकिन मड़ियादो में किसी बारात की तरह अंतिम यात्रा निकालकर विदाई दी गई. जिसमें बड़ी संख्या के लोगों ने भाग लिया.
कहते हैं कि इंसान का जन्म और मरण यह दो ही वक्त ऐसे होते हैं कि जहां हर्ष और विषाद दोनों का संयोग देखने को मिलता है. ऐसे ही हर्ष और विषाद के क्षण हटा ब्लॉक के ग्राम मड़ियादो में देखने को मिले. यहां पर एक महिला की मौत के बाद डीजे बैंड पार्टी, छतरी और संगीत की धुन पर अंतिम विदाई दी गई. दरअसल यहां हटा की रहवासी बड़ी मां जगरानी साहू का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके पैत्रिक ग्राम मड़ियादो में आज अंतिम संस्कार के पूर्व किसी बारात जैसे माहौल में शवयात्रा निकाली गई. बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों की संगीतमय धुनों के साथ श्रीमती जगरानी साहू की अंतिम यात्रा निकाली गई. जिसमें साहू समाज के अलावा अन्य वर्ग के लोगों की खासी भीड़ रही. इस दौरान मड़ियादो के मुक्तिधाम में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनिट का मौन धारण कर जहां मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की. यहां की साहू परिवार में यह परंपरा है कि जब किसी का निधन होता है तो मृत्यु को शक नहीं बल्कि महोत्सव के रूप में मनाते हैं यही कारण है कि जगरानी साहू को भी कुछ इसी अंदाज में विदाई दी गई पिछले वर्ष जब जगरानी साहू की सास का निधन हुआ था तब भी इसी तरह से बारात की तरह शोभा यात्रा निकालकर उन्हें भी अंतिम विदाई दी गई थी. उनके परिजन हरिशंकर साहू ने बताया कि मनुष्य का जन्म लाखों योनियों में भटकने के बाद प्रभु की कृपा से मिलता है. इसलिए जन्म के साथ मृत्यु को भी महोत्सव के रूप में मनाना चाहिए. जो मनुष्य इस देह को त्याग कर चला गया है वह दोबारा संसार में आने वाला नहीं है इसलिए जितनी खुशी उसके जन्म होने पर मनाई जाती है उसकी विदाई की इस तरह होना चाहिए. यह परंपरा उनके परिवार में कई वर्षों से चली आ रही है. फल स्वरुप आज भी इस परंपरा का निर्वाह है किया गया.

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