मार्च 17, 2026

13 माह से आउटसोर्स कर्मचारी वेतन के लिए परेशान, नपा ने वेतन दिलाने की बजाय जिम्मेदारी से झाड़ा पल्ला

दमोह. दमोह नगर पालिका में मचे भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है. यहां पर आउटसोर्स कर्मचारियों को सवा साल से वेतन नहीं दिया गया है. तो वहीं दूसरी ओर फर्जीवाड़े के तहत फर्जी बिलों का भुगतान किया गया है. मामले में कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं.
दमोह नगर पालिका में किस कदर भ्रष्टाचार मचा हुआ है यह किसी से छिपा नहीं है. हाल ही में फर्जीवाड़ा करके फर्जी बिलों का करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया. जिसकी जांच रिपोर्ट अभी पूरी भी नहीं हुई है कि एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है. जिसमें मुख्य नगर पालिका अधिकारी का दोहरी रवैया सामने आया है. दरअसल पिछले दिनों नगर पालिका ने टिपर वाहनों की मरम्मत, टायरों की खरीदी, सफाई व्यवस्था, ब्लीचिंग पाउडर, फिनाइल और फिटकरी खरीदी सहित कई तरह के फर्जी बिलों का 3 करोड़ से अधिक रुपए का भुगतान किया था. जिसमें न तो भुगतान पाने वाली कंपनियां के जीएसटी नंबर हैं, न नगर पालिका ने टेंडर आमंत्रित करके ठेके दिए थे. केवल अपने चहेतों को लाभ देने के लिए नगर पालिका ने सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से बिलों का भुगतान कर दिया. मामला संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने एक कमेटी का गठन कर 15 दिन के भीतर जांच पूरी करने के आदेश दिए थे, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट का कुछ भी अता-पता नहीं है. जिला प्रशासन भी इस बारे में कुछ भी नहीं बता पा रहा है. अभी यह मामला पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ कि एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है.

नगर पालिका ने जल विभाग सफाई विभाग सहित विभिन्न कार्यों के लिए आउटसोर्स पद्धति से कर्मचारियों को रखा हुआ है. जिसका ठेका भारत सिक्योरिटीज के पास है. लेकिन इस कंपनी ने अपने 58 कर्मचारियों को 13 माह से अधिक समय से वेतन नहीं दिया है. हैरानी की बात तो यह है कि कर्मचारी लगातार कलेक्टर को इस संबंध में ज्ञापन दे रहे हैं, लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई. दूसरी ओर मुख्य नगर पालिका अधिकारी सुषमा धाकड़ ने जिला प्रशासन को दिए गए एक लिखित पत्र में उल्लेख किया कि जिन कर्मचारियों द्वारा वेतन की मांग की जा रही है वह नगर पालिका के हैं ही नहीं. इसलिए उनके भुगतान का सवाल ही नहीं उठता. तो दूसरी तरफ सीएमओ ने उन्हीं कर्मचारियों को ड्यूटी आदेश जारी करके विभिन्न कार्यों में लगाई दी. लोकसभा निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने से मतदान, मतगणना तथा अन्य विविध कार्यों के लिए इन कर्मचारियों को पत्र जारी कर उन्हें ड्यूटी पर लगाया गया. ताज्जुब यह है कि जिन्हें नगर पालिका अपना कर्मचारी मानती ही नहीं है तो किस हैसियत से और किस आधार पर उन्हें ड्यूटी पर लगाने के लिए बकायदा आदेश पत्र जारी किए गए. कर्मचारियों ने बताया की वह वर्ष 2008 से लगातार नगर पालिका में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन कोरोना कार्यकाल में उन्हें आउटसोर्स में शिफ्ट कर दिया गया. जिसका ठेका स्थानीय भाजपा विधायक के एक कम खास कार्यकर्ता को दे दिया गया. कर्मचारियों ने बताया कि करीब 7000 से 7200 रुपए प्रति माह वेतन देना तय हुआ था. लेकिन आउटसोर्स कंपनी भारत सिक्योरिटीज उनसे 30 दिन काम लेने के बाद भी कभी 23 दिन कभी 26 दिन का भुगतान करती थी. कंपनी का कहना है कि जितने दिन की छुट्टी रही उतने दिन का भुगतान नहीं मिलेगा. पिछले 13 माह से अधिक समय से करीब 60 लाख रुपए कर्मचारियों का भुगतान रुका हुआ है. उन्होंने बताया कि जब इस मामले की शिकायत वर्तमान कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को की तो उन्होंने सभी कर्मचारी के बयान दर्ज कराए तथा मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं. लेकिन अभी भी उनका भुगतान नहीं किया गया है. सबसे अहम बात यह है की नगर पालिका द्वारा जारी किए गए दोनों पत्र जिसमें कर्मचारियों को अपना कर्मचारी न मानना तथा दूसरे आदेश में उनकी ड्यूटी लगाना जैसा संगीन अपराध का मामला बनता है. क्या इस मामले में मुख्य नगर पालिका की भूमिका भी की जांच समिति द्वारा जांच की जाएगी. इस मामले में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर का कहना है कि कर्मचारियों ने जो ज्ञापन दिया था उसके आधार पर जांच की जा रही है जांच के पश्चात ही कार्रवाई की जाएगी. वहीं सीएमओ सुषमा धाकड़ से कई बार फोन पर संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. वहीं नगर पालिका में बताया गया कि छुट्टी पर होने के कारण मुख्यालय पर नहीं हैं.

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