
दमोह. दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में फर्जी नियुक्ति मामले की रिपोर्ट आयुक्त को भेज दी गई है. हालांकि अभी आयुक्त ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है. वहीं कलेक्टर ने अनिर्णय की स्थिति में कार्रवाई करने की बात कही है.
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत संचालित दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में तीन कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति मामले की जांच रिपोर्ट आयुक्त को प्रेषित कर दी गई है. तीन सदस्यीय समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले मामलों का खुलासा किया है. तो वही विभाग पर भी नियुक्तियां को लेकर उंगलियां उठाई हैं. गौरतलब है कि इस प्रतिनिधि ने सबसे पहले इन नियुक्तियों से संबंधित फर्जीवाड़े का खुलासा किया था. उसके बाद जिला प्रशासन ने तीन माह से चल रही जांच रिपोर्ट शीघ्र ही पूरी कर सौंपने के आदेश जांच समिति को दिए थे. इसी वर्ष फरवरी में कई शिकायतों के बाद न्यायालय सामाजिक न्याय विभाग भोपाल ने 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट तैयार करने करने के निर्देश दिए थे. लेकिन कुछ विभागीय अधिकारियों एवं राजनीतिक दबाव के चलते जांच समिति रिपोर्ट तैयार नहीं कर पा रही थी. लेकिन जैसे ही इस मसले को प्रमुखता से उठाया तो मामला कलेक्टर के संज्ञान में आया तो उन्होंने शीघ्र जांच करने के निर्देश दिए. बीती 15 मई को जांच रिपोर्ट आयुक्त को भेज दी गई. इस संबंध में आयुक्त संदीप रजक ने बताया कि उनके पास जांच रिपोर्ट आ गई है. रिपोर्ट के अनुसार ही कार्रवाई कर निर्णय दिया जाएगा. हालांकि अभी निर्णय सुरक्षित रखा गया है
क्या निकला रिपोर्ट में
हमारे हाथ गोपनीय दस्तावेज लगे हैं. उसके अनुसार कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. जिसमें रियाज कुरैशी ने एक ही समय में कई जगह से डिप्लोमा और डिग्री भी हसिल कर ली है. फिजियोथैरेपिस्ट रियाज कुरैशी ने वर्ष 2003-04 में भारतीय योग अनुसंधान से योग की डिग्री ली. इसी तरह वर्ष 2004-05 में बरकतउल्ला विश्वाविद्यालय भोपाल से यूनियन बैचलर की डिग्री हासिल की. जबकी कोई भी डिग्री 3 वर्ष से कम की नहीं होती है. लेकिन इन्होंने एक साल में ही दो दो डिग्रियाँ हसिल कर ली. इसके अलावा यह रेग्युलर डिग्री करने के दौरान ही 16 फरवरी 2004 से 28 फरवरी 2004 तक करीब 8 दिन की वर्कशॉप क्लिनिकल पोस्ट मिशन मदुरई में जाकर ले ली. इसके अलावा नियुक्ति के ठीक 7 दिन पहले एक जनवरी 2006 से 30 सितंबर 2006 तक गुड़गांव के आशीर्वाद हॉस्पिटल से 9 महीने का डिप्लोमा भी कर लिया. 2006 में जिस वक्त उक्त पोस्ट के लिए अप्लाई किया था उस समय यह उस पोस्ट के लिए वांच्छित योग्यता भी नहीं रखते थे. लेकिन जांच कमेटी को दिये गए शपथ पत्र में यह उल्लेख किया की वह पूर्ण रूप से उस पद के योग्य थे और उनके पास वांच्छित योग्यता थी. इसी तरह अटेंडर प्रदीप नामदेव को तत्कालीन जिला पंचायत उपाध्यक्ष रामबाई परिहार ने 2016 में जमकर फटकार लगाई थी. तथा एक महिला से दिव्यांग प्रमाण पत्र के बदले लिए गए पैसे वापस कराए थे. उसका वीडियो की खूब वायरल हुआ था. जिसमें प्रदीप नामदेव ने रिश्वत लेना स्वीकार किया था. लेकिन रिपोर्ट में उसका कहीं उल्लेख नहीं किया गया है. तीनों कर्मचारी रियाज कुरैशी, लेखपाल धर्मेंद्र परिहार एवं अटेंडर प्रदीप नामदेव के कोई भी दस्तावेज जो नियुक्ति से संबंध रखते हैं विभाग में नहीं पाए गए. इन तीनों कर्मचारियों के पास विभाग से दिया जाने वाला कोई नियुक्ति पत्र भी इन्होंने समिति को नहीं दिखाया.
संविदा का रिकॉर्ड भी नहीं
दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में कई नियुक्तियां संविदा के आधार पर होती हैं. लेकिन इन तीनों कर्मचारियों की नियुक्ति न तो संविदा आधार पर थी और न ही नियमित आधार पर. विभागीय नियम के अनुसार संविदा पर नियुक्ति केवल एक वर्ष के लिए होती है. यदि उसमें कर्मचारी के कामकाज से विभाग संतुष्ट होता है तो उसका संविदा एग्रीमेंट एक साल के लिए बढ़ा दिया जाता है. लेकिन इन 18 वर्षों में इन तीनों कर्मचारियों का संविदा एग्रीमेंट का भी कोई रिकॉर्ड नहीं है. जबकि अन्य कर्मचारियों के संविदा एग्रीमेंट उपलब्ध हैं. जिससे यह स्पष्ट होता है की यह तीनों कर्मचारी संविदा पर भी नियुक्त नहीं थे. यह कुछ विभागीय अधिकारियों की कृपा के करण फर्जीवाड़े के तहत नौकरी कर रहे थे. रिपोर्ट आने के बाद जब इस मामले में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचार से की गई कार्रवाई के संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा की आयुक्त ने जांच प्रतिवेदन मांगा था. जो हमने भेज दिया है. यदि भोपाल से कोई कार्रवाई नहीं होती है या उसमें विलंब होता है तो हम उस अवस्था में मार्गदर्शन लेकर कार्रवाई करेेंगे.

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