
दमोह दमोह से दिल्ली गई 19 लड़के-लड़कियों के गायब होने की एक ट्वीट के बाद हड़कंप मच गया. पुलिस प्रशासन तत्काल हरकत में आया और पड़ताल के बाद मामले का एसपी ने पटाक्षेप किया. हालांकि यह भी कहा कि पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है.
दमोह में जरा भी कुछ होता है और पर एकदम से चढ़ जाता है. और पारा चढ़ता है तो साथ ही लाल बंधु भी घेरे में आ जाते हैं. ऐसा ही एक मामला लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी द्वारा आज सुबह x पर की गई एक पोस्ट के बाद प्रशासनिक अमले में हलचल मच गई. दमोह से लेकर भोपाल और दिल्ली तक देखते ही देखते राजनीतिक पर भी चढ़ गया. लेकिन गनीमत रही कि मामले का खुलासा हो गया. दरअसल आईटीसी संस्था द्वारा संचालित प्रथम एन जी ओ चलाया जाता है. जिसका उद्देश्य बालिग लड़के और लड़कियों को उनकी योग्यता के अनुसार वोकेशनल ट्रेनिंग उपलब्ध कराना है. ट्रेनिंग के बाद प्लेसमेंट दिया जाता है. इसका टाइपअप सीआईसीएम प्रमुख अजय लाल के एक एनजीओ से है, और जितने भी प्लेसमेंट होते हैं वह इस एजेंसी के माध्यम से होते हैं. ताजा मामला यह है कि लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी ने आज सुबह एक x पर एक पोस्ट किया था जिसमें कहा गया कि , धर्मांतरण और मानव तश्करी जैसे गंभीर आरोप झेल रहे अजय लाल पर लीगल राइट ऑब्ज़र्वेटरी LRO ने ट्वीट कर लगाए गभीर आरोप, अजय लाल और मेक्सन मेसी द्वारा संचालित NGO सुनहरा कल से 22 लड़कियों के गायब होने कि शिकायत सामने आई है, उक्त ट्वीट में लड़कियों से उनके मोबाइल छीनने की बात भी आई है सामने, इतनी ट्वीट के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया पुलिस अधीक्षक श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने तुरंत ही पूरे मामले की जानकारी तलब की. पूरे मामले की प्राथमिक तौर पर पड़ताल कराई. इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह मामला मानव तस्करी और धर्मांतरण का नहीं है. बल्कि रोजगार से संबंधित मामला है. उन्होंने मीडिया को बताया की लड़के-लड़कियों की संख्या 22 नहीं बल्कि 19 है. जिसमें 16 लड़कियां और तीन लड़के शामिल है. इन सभी लड़कियों में से 16 बच्चे अपनी घरों में आ शहर आ चुके हैं. उनके माता-पिता से भी बात हो गई है. सिर्फ तीन बच्चे ही है जो घर पर नहीं पहुंचे हैं उनमें से भी दो बच्चे दिल्ली में रहकर ही नौकरी कर रहे हैं. जबकि केवल एक लड़की जो बालिग है वह गायब है. और उसकी प्राथमिक रिपोर्ट दिल्ली के अशोक नगर पुलिस थाने में दर्ज है. हम कॉल डिटेल मैसेज लोकेशन और भी कई तरह के साइबर टूल की मदद से गुमशुदा बच्ची की तलाश करने का प्रयास कर रहे हैं. उम्मीद है कि दो से तीन दिन के अंदर उसे बच्ची का हम पता लगा लेंगे और उसे परिवार के सुपुर्द कर दिया जाएगा. पुलिस अधीक्षक ने यह भी कहा कि प्रथम संस्था मुंबई की बहुत बड़ी एजुकेशनल संस्था है. इसका मानव तस्करी और धर्मांतरण से कोई लेना-देना नहीं है. हम इस मामले की भी जांच कर रहे हैं कि क्या बच्चियों के साथ किसी तरह की कोई घटना हुई थी या नहीं. हमने सभी बच्चियों और उनके पेरेंट्स को आज शाम ही पुलिस थाने में बुलाया है. हम इस मामले की पूरी जांच कर रहे हैं कि आखिर यह इसमें सच्चाई कितनी है. यदि किसी भी तरह की कोई गैरकानूनी बात निकाल कर सामने आती है तो हम कानून के तहत कार्रवाई करेंगे.

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