
दमोह। भाजपा की तरह अब कांग्रेस में भी बगावत के स्वर फूटने लगे हैं। दलित समाज के दो बड़े नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा देकर बसपा से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है, यह हम नहीं बल्कि सामने आ रही राजनीतिक तस्वीरों से खुद बयां हो रहा है। कांग्रेस के दो बड़े दलित नेताओं ने पार्टी को बाय-बाय कहकर बसपा का दामन थाम लिया है। ताज़्जुब तो इस बात का है की लगे हाथ पार्टी ने एक नेता को दमोह से प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है। जबकि दूसरे नेता का टिकट लगभग 90% फाइनल माना जा रहा है। आज बसपा द्वारा की गई एक प्रेस वार्ता में दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त की। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और सुरेश पचौरी गुटके खासम खास माने जाने वाले भगवान दास चौधरी हटा सुरक्षित सीट से टिकट मांग रहे थे लेकिन उनकी जगह पार्टी ने प्रदीप खटीक को अपना उम्मीदवार बनाया है। इससे रूष्ट होकर उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देकर बसपा का दामन थाम लिया। तो दूसरी ओर अज्जाक्स संघ के जिला अध्यक्ष प्रताप रोहित ने भी बसपा का दामन थाम लिया। पार्टी ने भी देरी न करते हुए लगे हाथ उन्हें हटासे टिकट भी दे दिया। अब इन दोनों नेताओं का कहना है कि वह कांग्रेस और भाजपा को करारा जवाब देंगे। दलित मतदाताओं के साथ जिस तरह का खिलवाड़ किया गया है उसका जवाब मिलेगा। पहले हम बात करते हैं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भगवानदास चौधरी की जो कभी विधायक अजय टंडन के खास और सुरेश पचौरी के क़रीब माने जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के जिला अध्यक्ष रतनचंद जैन की कृपा से उनका टिकट कट गया है। इस समय अध्यक्ष रतन चंद जैन बेहद पावरफुल है। उन्हीं के कहने पर मेरा टिकट काटा गया है और प्रदीप खटीक को हटा सुरक्षित सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। उनका कहना है कि हटा विधानसभा में सिर्फ डेढ़ सौ परिवारो के लिए करीब 45000 दलित मतदाताओं के साथ छलावा किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में दमोह संसदीय क्षेत्र के 2 लाख से अधिक दलित मतदाता रतनचंद जैन को करारा जवाब देंगे।
विधायक पर साधा निशाना
लगे हाथ उन्होंने अजय टंडन को भी लपेट लिया। उन्होंने कहा कि मैंने इस बात की शिकायत अजय टंडन से की थी कि रतन भैया ठीक नहीं कर रहे हैं लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी। मैंने कहा था कि मैं जो सेक्टर मंडल बनाता हूं वह स्वीकृत नहीं होते लेकिन प्रदीप खटीक के सेक्टर मंडल स्वीकृत करा दिए जाते हैं। पहले जो जिला अध्यक्ष थे उनका मेरे सिर पर हाथ था। चौधरी का इशारा कांग्रेस से प्रबल दावेदारी कर रहे मनु मिश्रा की तरफ था। यह बयान देकर चौधरी ने एक साथ दो निशाने लगाने की कोशिश की है।
ब्राम्हणों को रिझाने की कोशिश
एक तो ब्राह्मण वोट बैंक को कांग्रेस में जाने से रोकना, दूसरा असंतुष्ट नेताओं को अपनी पाले में शामिल करना। अब दलित मतदाता कांग्रेस का कितना साथ देते हैं यह तो वक्त बताएगा लेकिन कांग्रेस के लिए फिलहाल शुभ संकेत नहीं हैं।
पार्टी छोड़ते ही टिकट मिली
दूसरी तरफ अज्जाक्स संघ के अध्यक्ष प्रताप रोहित प्रेस वार्ता में रुआंसे से हो गए। उन्होंने कहा कि मेरे साथ छलावा करके मुझे जेल भिजवाया गया। मुझ पर सात अपराधिक प्रकरण दर्ज कराए गए। जो की पूरी तरह झूठे थे। मैं 1 साल तक जेल में रहा लेकिन किसी ने मेरा साथ नहीं दिया। मेरा एक साल कौन लौटएगा? मैं पूरी तरह निर्दोष होकर बाहर आया हूं। मैं किसी का नाम लेना नहीं चाहता, लेकिन यह चुनाव बताएगा कि कौन किस पर भारी है। उन्होंने दावा किया कि दलित समाज के हटा में 45 हज़ार तो दमोह में करीब 56 हज़ार मतदाता हैं। दोनों ही नेताओं ने एक स्वर में कहा कि दलित समाज अपना यह अपमान नहीं सहेगा।
प्रताप रोहित दमोह से बसपा के उम्मीदवार हैं। जबकि उनके बड़े भाई और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष प्रताप रोहित दमोह विधायक अजय टंडन के बहुत ही खास हैं। ऐसे में उनके लिए एक धर्म संकट भी पैदा हो गया है कि वह इस चुनाव में किसका साथ देंगे? अपनी सगे भाई का या फिर अपने नेता का?
यह भी हो सकता है
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है यह सब मैनेजमेंट का एक हिस्सा है। पिछले कुछ चुनाव से दलित वोट बैंक बीजेपी के पाले में सरकता जा रहा है। ऐसे में यह भी हो सकता है कि कांग्रेस ने उस वोट बैंक को बीजेपी में जाने से रोकने के लिए ही अपने नेता को बसपा में प्लांट कर दिया और अब उसे भाजपा में जाने से रोका जाएगा। दूसरा गणित यह भी है कि भाजपा की ही यह पॉलिटिक्स हो कि दलित वोट बैंक को कांग्रेस में जाने से रोकने के लिए अंदरुनी मैनेजमेंट जमाया गया हो। बहरहाल राजनीति में कुछ भी संभव है ऐसे मैं कब क्या हो जाए कहना मुश्किल है।

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