मार्च 17, 2026

दरिद्र नारायण की सेवा ईश्वर की सच्ची पूजा है: केंद्रीय मंत्री

दमोह। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने प्रतिमाओं को खुद ही साफ किया। साथ ही नगर पालिका अधिकारियों को फटकार भी लगाई।
एकात्म मानवतावाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म जयंती आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा उत्साह पूर्वक मनाई गई। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री प्रहलाद पटेल ने दीनदयाल पार्क में स्थित पंडित दीनदयाल की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उन्होंने बेलाताल चौराहे पर स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, राम मनोहर लोहिया एवं पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। प्रतिमाओं की सफाई न देख कर केंद्रीय मंत्री ने नगर पालिका के अधिकारियों को फटकार लगाई भी लगाई। साथ ही वहां पर निरंतर प्रतिमाओं की सफाई करने के निर्देश भी दिए। इसके बाद उन्होंने अपना रुमाल निकाल कर स्वयं ही श्री लोहिया एवं श्री गांधी की प्रतिमा को पोंछने के बाद माल्यार्पण किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानवतावाद के प्रेरणा स्रोत हैं। 2 वर्ष पूर्व ही हमने उनकी 100 की वर्षगांठ मनाई थी। उन्होंने कहा कि मैं इसे दूसरे दृष्टिकोण से देखता हूं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जो एकात्म मानवतावाद का विचार दिया था। यह विचार हमारी सनातन परंपरा का प्रतिरूप है।

वसुधैव कुटुंब की परंपरा का आदर्श रूप है। उन्होंने कहा कि दरिद्र नारायण की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। यदि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को अपनी बराबरी पर ले कर आओगी तभी तुम्हारी राजनीतिक सफलता होगी। तुम्हारे विचार की सफलता होगी। जब उन्होंने कहा था कब हमारे भारत में उनके विचार को मानने वाले लोग नहीं थे। लेकिन जब हम उनकी सौवीं जयंती मना रहे थे तब भारतीय जनता पार्टी की स्पष्ट बहुमत की सरकार थी। हमारी कोई भी सरकार हो चाहे वह राज्य सरकार हो या खासकर प्रधानमंत्री मोदी ने जो भी योजनाएं चलाई वह उस दरिद्र नारायण के लिए समर्पित हैं। चाहे वह आवास हो, शौचालय हो, गैस हो, हर घर जल हो, आयुष्मान कार्ड हो या या रोजमर्रा की चीजे हो, उसमें सरकार का दखल गरीब आदमी के साथ होना चाहिए। यह हमारी सरकारों, हमारे कार्यकर्ताओं की दीनदयाल जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। मैं मानता कोई भी व्यक्ति जो भारत की धरती पर पैदा हुआ है चाहे वह किसी भी जाति वर्ण का हो उसे दीनदयाल जी को पढ़ना चाहिए और उनके आदर्शों पर चलना चाहिए।

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