मार्च 17, 2026

एक ही दिन में 6 मासूमों की जल समाधि, दर्दनाक हादसों ने लोगों को झकझोरा

दमोह। तेंदूखेड़ा के बाद जिले में जबेरा और दमोह नगर में तीन और मासूमों की जल समाधि ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। बीती देर रात दमोह में दो और जबेरा में एक मासूम का शव निकाला गया। लोगों ने अव्यवस्था पर प्रशासनिक पर सवाल उठाते हुए धरना भी दिया।
जिले में बुधवार का दिन आधा दर्जन मासूम बच्चों के मामले में स्याह दिवस साबित हुआ। देर शाम के बाद तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पानी में डूबने से 6 बच्चों की जल समाधि ने लोगों को गमगीन कर दिया। तेंदूखेड़ा के नरगुवां तालाब में तीन नाबालिग बच्चों की डूबने से मौत हो गई थी। तो दूसरी दु:खद घटना जबेरा क्षेत्र से सामने आई।


जबेरा में एक जल समाधि
जबेरा में अवैध खनन की तलैया में डूबा मासूम जबेरा थाना अंतर्गत ग्राम घाट खमरिया में तलैया में डूबने से एक मासूम बच्चे की बुधवार को मौत हो जाने का दुखद घटनाक्रम सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 वर्षीय सत्यम प्रजापति तलैया में नहाते समय गहराई में चले जाने के बाद डूब कर वापस नहीं आया। बाद में उसकी तलाश किए जाने पर बमुश्किल निकाल कर देर रात जबेरा के स्वास्थ्य केंद्र लाया गया जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
किशुन तलैया में दो डूबे
ऐसा ही मामला दमोह नगर के किशुन तलैया में सामने आया। सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकले दो बच्चों के शव बरामद किए गए। दरअसल महाराणा प्रताप स्कूल में कक्षा 11वीं के छात्र अंकित पटेल और राज रैकवार स्कूल से घर वापस नहीं लौटे। काफी खोजबीन करने के बाद रात नौ बजे उनके बैग किशुन तलैया के पास डले मिले थे। जिसके बाद पुलिस और होमगार्ड के गोताखोरों को सूचना दी गई। लेकिन दोनों ही विभागों ने रात्रि में इंतजाम न होने का बहाना बनाकर रात्रि में सर्च ऑपरेशन से इंकार कर दिया। इसके बाद एक बार समाज के युवाओं ने तालाब में छलांग लगाई और शवों को खोजना प्रारंभ किया रात्रि के 1:00 बजे के बाद दोनों के शव किशुन तलैया से बरामद किए गए इस घटना से परिजनों और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अंबेडकर चौक पर धरना दे दिया पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। साथ ही खनिज विभाग के खिलाफ नारे लगाए लोगों के आरोप कि अवैध उत्खनन के कारण जहां तहां तालाब बन गए हैं और उनमें बच्चे डूब रहे हैं। यदि प्रशासनिक व्यवस्थाएं चुस्त होती यह सब नहीं होता। शव निकाले जाने के बाद लोगों ने एंबुलेंस बुलाने के लिए अस्पताल को सूचना दी लेकिन एंबुलेंस भी नहीं पहुंची। उसके बाद शवों को बाइक से लाया गया तथा अंबेडकर चौक पर धरना दिया गया। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन कि असंवेदनशीलता इसी से पता चलती है कि दो मासूमों के शव के लिए एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराया।

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