
दमोह। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। बुखार से पीड़ित एक बच्ची का डॉक्टरों ने जबरन ऑपरेशन कर दिया लिहाजा होश आने पर उसकी आंखों की रोशनी चली गई परिजनों पर गंभीर आरोप लगा रही हैं।
सागर का बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज अजब गजब है। यहां पर आए दिन कुछ न कुछ ऐसा होता रहता है कि वह सुर्खियां बन जाती हैं। ताजा मामला भी कुछ ऐसा है कि पूरे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। बताया जाता है कि सागर में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के हड्डीरोग विभाग में 10 साल की बच्ची के पैर के सेकंड ऑपरेशन डॉक्टरों ने बड़ी लापरवाही की है। ऑपरेशन के बाद से बच्ची को दोनों आंखों से दिखना बंद हो गया। अब डॉक्टर अपनी गलती को छिपाने के लिए परिजनों पर जबरन भोपाल ले जाने का दबाव बना रहे हैं।
जानकारी के अनुसार तीन महीने पहले एक एक्सीडेंट में बंडा निवासी माखन लोधी की 10 वर्षीय बच्ची रिया पुत्री एक्सीडेंट हो गया था जिससे उसके पैर का ऑपरेशन कर घुटने और जांघ के बीच हड्डी रॉड (इम्प्लांट) डाली गई थी। लगभग नौ दिन पहले पिछले गुरुवार को उसे दोबारा दूसरे ऑपरेशन के लिए बीएमसी बुलाया गया था। जिसमें उसके पैर में हड्डी की जुड़ चुकी हड्डी में से रॉड वापस निकालना थी। लेकिन बच्ची को तेज बुखार था। यह बात बच्ची के परिजनों ने रात में स्टाफ को बताई थी। लेकिन परिजनों की मेडिकल स्टॉफ ने कोई बात नहीं सुनी। डॉक्टरों ने भी बिना जांच किए ही उसका ऑपरेशन कर दिया। करीब 2 घंटे के ऑपरेशन के बाद ही बच्ची को कोटी से बाहर नहीं लाया गया तथा उसे पीआईसीयू में भर्ती कर दिया गया।
*होश आया तो बच्ची बोली मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा
जब 9 साल की बच्ची को होश आया तो उसने कहा कि मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। बच्ची की मां सविता लोधी का कहना है कि डॉक्टरों ने बड़ी लापरवाही की है उन्हें बताया भी गया था कि बच्ची को बुखार है लेकिन उन्होंने जबरन ऑपरेशन कर दिया। बेटी को जब दो दिन बाद होश आया तो उसे कुछ भी दिख नहीं रहा था। 9 दिन बाद भी उसको ठीक तरह से दिखाई नहीं दे रहा है अभी भी उसको बहुत हल्का ही दिखता है। जिससे पूरे परिजन घबराए हुए हैं।
ऑपरेशन के दौरान बंद हो गई थी धड़कन
पीड़िता की मां सविता ने बताया कि शुक्रवार को ऑपरेशन होने के बाद भी जब उसे थिएटर से 4 घंटे तक बाहर नहीं लाए तो स्टाफ और डॉक्टरों से पूछा तो बताया कि ऑपरेशन तो ठीक हो गया था लेकिन बच्ची के दिल की धडकन, बंद हो गई थी। बहुत प्रयास करके उसे वापस लाए हैं। घटना के बाद डॉक्टर अपनी गलती छुपाने के लिए परिजनों पर ही आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि बच्ची के परिजनों ने बताया ही नहीं कि उसे बुखार था। जबकि ऑपरेशन से पहले दर्जनों जांचे होती हैं।
ब्रेन में क्लोटिंग से हुई समस्या
बीएमसी में आर्थोपेडिक विभाग के एचओडी डॉ राजेश जैन का कहना है कि रिया की आंखों की रोशनी चली गई। मुझे इसकी जानकारी मिली है। उसके पैर का ऑपरेशन सेकंड यूनिट के डॉक्टरों ने किया है। लेकिन इसमें डॉक्टरों की लापरवाही नहीं है। मरीज की एमआरआई कराई है जिसमें उसमें ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग पाई गई है। डॉक्टर बच्ची का इलाज कर रहे हैं नियमानुसार सहमति पत्र पर भी परिजनों ने हस्ताक्षर किए थे।


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