
जीत के बाद प्रमाण पत्र लेती। हुईं सत्या चौरसिया।
दमोह। नगरीय निकाय चुनाव में बहुमत के करीब रहने के बाद भी कांग्रेस पथरिया में सरकार नहीं बना पा रही है। वहां पर अध्यक्ष पद को लेकर पेच फंसा हुआ है।
सबसे सरल समझी जाने वाली पथरिया नगर पंचायत में अध्यक्ष पद को लेकर पेंच फंसा हुआ है। नंबर के हिसाब से कांग्रेस के पास बहुमत से मात्र 1 सीट कम है, लेकिन उसके बाद भी कांग्रेस की सरकार बनती नहीं दिख रही है। तो दूसरी ओर मात्र 3 सीटों वाली बसपा सरकार बनाने के लिए लालायित है। सारा दारोमदार एक मात्र निर्दलीय उम्मीदवार पर टिका हुआ है। वह जिसे अपना समर्थन देगा सरकार उसी की बनेगी। पथरिया में केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल की भूमिका अहम हो रही है। यदि प्रहलाद पटेल चाहेंगे तो भाजपा की सरकार बन सकती है लेकिन समर्थन को लेकर दो तरफा खाई है।
कांग्रेस के लिए खतरा
गौरतलब है कि 15 सदस्य पथरिया नगर पंचायत में सबसे ज्यादा साथ पार्षद कांग्रेस के जीत कर आए हैं। उसे बहुमत के लिए मात्र एक पार्षद की आवश्यकता है। जबकि दूसरे नंबर पर 4 सीटों के साथ भाजपा और 3 सीटों पर बसपा की मौजूदगी है। ऐसे में एकमात्र निर्दलीय पार्षद वार्ड क्रमांक 9 से निर्वाचित श्रीमती सत्या चौरसिया की भूमिका अहम हो जाती है। वह अपना समर्थन कांग्रेस को देती हैं तो निश्चित रूप से कांग्रेस की सरकार बन जाएगी और यदि वह अपना समर्थन नहीं देती हैं तो कांग्रेस की सरकार बनना मुश्किल है।
बसपा भी प्रयास में
दूसरी तरफ भाजपा वॉच एंड वेट की स्थिति में है। वहां पर भाजपा सरकार बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। अंदरूनी स्टार पर भले ही प्रयास जारी हो लेकिन ऐसा दिख नहीं रहा है। दूसरे विकल्प के रूप में भाजपा, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवार मिलकर सरकार बना सकते हैं। लेकिन बसपा खुद भी अपना अध्यक्ष बनाने के लिए प्रयासरत है। वार्ड क्रमांक 6 से सुंदर विश्वकर्मा बसपा से निर्वाचित हुए हैं और वह भी अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं।
क्यों फंसा है पेंच
दरअसल वार्ड क्रमांक 9 से निर्वाचित प्रत्याशी श्रीमती सत्या चौरसिया नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष कैलाश चौरसिया के कुटुंब से हैं। कैलाश चौरसिया की गहरी रिश्तेदारी गोटेगांव तथा हटा में है। चौरसिया परिवार से लंबे समय से प्रहलाद पटेल से जुड़ा हुआ है। उनके पारिवारिक संबंध है और प्रहलाद पटेल जहां कहेंगे वहीं चौरसिया परिवार का वोट जाएगा। ऐसे में इस चुनाव में प्रहलाद पटेल की भूमिका भी अहम हो जाती है। लेकिन यहां पर एक पेंच और फंसा हुआ है। वह पेंच यह है कि 2 वर्ष पूर्व हटा में बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड में पथरिया विधायक के परिजनों का नाम आने के बाद चौरसिया समाज बसपा से नाराज हैं। ऐसे में वह भाजपा और बसपा के गठजोड़ वाले अध्यक्ष को अपना वोट देंगे या नहीं यह भी महत्वपूर्ण बात है। यहां पर इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि स्वर्गीय कैलाश चौरसिया की मृत्यु के बाद भाजपा या कांग्रेस ने कभी भी चौरसिया परिवार के हाल-चाल पार्टी गतस्तर पर जानने का प्रयास नहीं किया। उनका दोनों दलों से दूरी बनाने का एक कारण यह भी है।
परिजन करेंगे फैसला
निर्दलीय प्रत्याशी श्रीमती सत्या चौरसिया के परिवार में करीब 200 लोगों का कुनवा है। परिवार के वरिष्ठ सदस्य अरविंद चौरसिया ने ईटीवी को बताया कि हम परिवार के लोग बैठकर यह बात तय करेंगे कि अपना समर्थन किसे दिया जाए। दूसरी ओर एक-दो दिन में केंद्रीय मंत्री (प्रहलाद पटेल) पथरिया आने वाले हैं। उनके साथ भी इस विषय पर चर्चा की जाएगी और जो फैसला होगा हम उसी पर अमल करके अपना वोट देंगे।
सरकार के दो विकल्प
पथरिया में सरकार बनाने के लिए मात्र दो विकल्प हैं एक विकल्प में निर्दलीय प्रत्याशी अपना समर्थन कांग्रेस के अध्यक्ष पद के दावेदार लक्ष्मण सिंह को दे दें या फिर दूसरे विकल्प के रूप में वह बसपा और भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाएं हिंदू ही सूरत में वहां पर किसी की सरकार बन सकती है।



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