
दमोह. भाजपा बांसा ग्रामीण मंडल के पूर्व अध्यक्ष की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि एक आरोपी अभी फरार है. इस बात का खुलासा पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने प्रेस वार्ता में किया है.
मंगलवार की दोपहर सागर दमोह रोड पर नर्सरी के सामने एक स्कॉर्पियो की टक्कर से भाजपा ग्रामीण मंडल के पूर्व अध्यक्ष देवेंद्र राजपूत की मौत हो गई थी. इस मामले में सा
मान्य सड़क दुर्घटना कम एवं साजिश की आशंका के मद्देनजर जब पुलिस ने अपनी पड़ताल की तो मामले की कड़िया जानबूझकर हत्या कर देने से लेकर जुड़ गई. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज चश्मदीद गवाहों अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना के आरोपी वैभव पुत्र दुर्गश सिंह राजपूत, विशाल पिता दुर्गश सिंह राजपूत और अभिषेक पुत्र नरेश सिंह राजपूत के विरुद्ध प्रकरण पंजीवद्ध कर विवेचना में लिया. आरोपीयान वैभव और उसके भाई विशाल को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त स्कार्पियो वाहन क्रं. MP-04-SJ-0999 को जप्त कर लिया है. पुलिस ने फिलहाल इतना ही खुलासा किया है कि पुरानी बुराई एवं सरपंची चुनाव को लेकर के यह घटना हुई है लेकिन भास्कर न्यूज़ को सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके अनुसार यह बुराई केवल इतनी ही नहीं है इसके लंबे तार हैं.
दरअसल इसकी शुरुआत वर्ष 2009- 2010 में उस समय हुई थी जब मृतक देवेंद्र के छोटे भाई त्रिवेन्द् राजपूत ने ग्राम पंचायत बरमासा से सरपंच पद के लिए फॉर्म भरा था. जबकि आरोपी वैभव के ताऊ और दुर्गेश राजपूत के बड़े भाई रमेश राजपूत ने भी फार्म दाखिल किया था. लेकिन इस चुनाव में त्रिवेंद्र सिंह को विजय मिली और रमेश को हार का मुंह देखना पड़ा था. उसी समय यह विवाद शुरू हो गया था. दरअसल रमेश और त्रिवेंद्र आपस के रिश्ते में मामा भांजे हैं. साथ ही उनके घर की दीवार से दीवार भी लगी हुई है. चुनाव के पहले तक इनके संबंध काफी अच्छी थे. लेकिन चुनाव में जो बुराई हुई तो समय के साथ बढ़ती चली गई. इसके बाद वर्ष 2013-14 में जब एक बार त्रिवेंद्र सिंह ने सामूहिक रूप से धुरेड़ी के दिन होली मिलन का कार्यक्रम आयोजित किया तो उसमें सभी लोग थे. लेकिन उस कार्यक्रम में रमेश और त्रिवेंद्र के बीच किसी बात को लेकर कहा सुनी और झड़प हो गई. जिसके बाद यह बुराई और बढ़ गई. लेकिन इस विवाद को हवा तब मिली जब करीब ढाई- तीन वर्ष पहले गांव के कुछ दलित युवकों का विवाद दुर्गेश राजपूत से हो गया. जिसकी बाद उन्होंने दुर्गेश के साथ मारपीट कर दी. इस मामले में युवक कुछ समय जेल में भी रहे. लेकिन जमानत पर रिहा हो गए. इसी दरमियान गांव में एक घटनाक्रम और हुआ, जिसमें एक गोली कांड हुआ था. इस मामले में दलित एक युवक को गोली लगी थी और उसने आरोपियों के रूप में रमेश राजपूत और उनके परिजनों का नाम रिपोर्ट में लिखाया था. जिसके बाद पुलिस ने रमेश एवं अन्य लोगों पर मामला का दर्ज किया था. रमेश राजपूत और उनके परिजनों को यह आशंका थी कि संभवत दलित युवाओं की मदद देवेंद्र राजपूत ने की है या वह कर रहा है, जिसके कारण अदावत बढ़ती गई और फिर इसकी परिणति मंगलवार को हुए हत्याकांड के रूप में सामने आई. पुलिस ने जो स्कॉर्पियो गाड़ी जप्त की है वह भले ही किसी के नाम पर रजिस्टर्ड हो लेकिन पिछले कुछ सालों से दुर्गेश राजपूत के पास थी और वह तथा उसकी लड़के चलाते थे.

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