मार्च 17, 2026

एडीजे को एसपी से जान का खतरा

दमोह। बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्या कांड मामले की सुनवाई कर रहे अपर सत्र न्यायाधीश के विरुद्ध षड्यंत्र रचा जा रहा है। इस बात का खुलासा अपर सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश पत्र में किया है। इतना ही नहीं एसपी और उनके अधीनस्थों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश के इतिहास में संभवत यह पहला मामला होगा जहां पर एक न्यायाधीश ने एसपी और उनके अधीनस्थों पर ही अपने विरुद्ध षड्यंत्र रचने के गंभीर आरोप लगाते हुए किसी अप्रिय घटना होने की आशंका जताई है। बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले की सुनवाई कर रहे हटा न्यायालय में पदस्थ अपर सत्र न्यायाधीश आरपी सोनकर ने उनके साथ अब तक हुए घटनाक्रम का संपूर्ण ब्यौरा भी दिया है। मालूम है कि इस मामले में पथरिया से दबंग विधायक रामबाई परिहार के पति गोविंद सिंह परिहार, देवर कौशलेंद्र उर्फ चंदू परिहार, भतीजे दीपेंद्र उर्फ गोलू परिहार, जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के पुत्र इंद्रपाल पटेल सहित 20 आरोपी अभियुक्त बनाए गए हैं। जिसमें से अभी गोविंद सिंह फरार चल रहे हैं।
ऐसे समझे मामले की गंभीरता
6 फरवरी को हुई सुनवाई में न्यायालय ने आरोपी गोविंद सिंह की गिरफ्तारी के संबंध में हटा एसडीओपी भावना दांगी के कथन लिए थे। जिसके बाद यह सारा घटनाक्रम हुआ। 8 फरवरी के अपने आदेश पत्र में अपर सत्र न्यायालय ने स्पष्ट लिखा है कि हटा अनुविभाग में पदस्थ न्यायाधीश राजकुमार गौड़ 6 फरवरी को उनके निवास पर आए और उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व एएसपी शिव कुमार सिंह के मोबाइल नंबर 9424745203 से उनके मोबाइल नंबर पर फ़ोन आया था और उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शरद लिटोरिया का नंबर मांगा था जो कि दिया है। इसके बाद रात 8:19 बजे बताया गया कि श्री लिटोरिया से एएसपी की बात हो गई है। एएसपी ने बताया कि एसडीओपी भावना दांगी ने एसपी को इस्तीफा दे दिया है। बहुत समझाने पर भी नहीं मानी और सीएम और डीजीपी को शिकायत करने इस्तीफा फेंक कर चली गई। काफी खोजने पर भी एसडीओपी नहीं मिली और उनका पता नहीं चल रहा है कि वह कहां है और वह कुछ भी कर सकती है। यह सारी बात श्री लिटोरिया ने न्यायाधीश श्री सोनकर के घर जाकर बताइ तथा वापस एएसपी को बताया कि 6 तारीख में सामान्य कथन हुए थे। जिस पर एएसपी ने कहा कि एसपी साहब का कहना है कि अपर सत्र न्यायाधीश थोड़ी रियायत बरतें। घटना के दूसरे दिन यानी 7 फरवरी को अनुभाग में पदस्थ न्यायाधीश श्री गौड़ ने बताया कि एएसपी ने बताया कि एसडीओपी भावना दांगी मिल गई है। और वह अब मामले की शिकायत करने चीफ जस्टिस के पास जा रही है। जिसमें उन्होंने कहा है कि अपर सत्र न्यायाधीश ने उन्हें हिरासमेंट किया है।
यह केवल प्रदर्शन बाजी थी
पुलिस के आला अधिकारी न्यायालय की प्रक्रिया और न्यायाधीशों के साथ किस तरह खिलवाड़ करते हैं इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को केवल प्रदर्शन बाजी कहा। 7 तारीख को श्री लिटोरिया ने बताया कि एएसपी ने फोन पर बताया कि कल की घटना केवल प्रदर्शन बाजी थी। बाकी बात डिटेल में बताऊंगा। पुलिस के अधिकारी न्यायाधीश पर किस तरह मानसिक दबाव बना रहे हैं यह उसका एक उदाहरण मात्र है।
अपर सत्र न्यायाधीश आरपी सोनकर आगे लिखते हैं कि अभियुक्त गण काफी राजनीतिक प्रभावशाली प्रकरण अंतरित कराने के लिए मिथ्या आरोप लगा चुके हैं। उनका आवेदन न्यायालय में मिथ्या साबित होकर निरस्त हो चुका है। अभियुक्त गणों की भांति ही अब एसपी अपने अधीनस्थों के साथ मेरे ऊपर झूठे एवं मनगढ़ंत आरोप लगाकर दबाव बनाया जा रहा है। भविष्य में मेरे साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है। विद्वान न्यायाधीश पुलिस अधिकारियों के रवैया से किस तरह मानसिक संत्रास झेल रहे हैं इसकी एक झलक आगे की उन दो लाइनों में मिलती है जिसमें उन्होंने जिला सत्र न्यायाधीश से इस मामले को किसी और न्यायालय में अंतरित करने का निवेदन किया है। इस मामले में पुलिस अधीक्षक हेमंत चौहान ने मीडिया से कुछ भी कहने से स्पष्ट इनकार कर दिया। वहीं एसपी शिवकुमार सिंह और एसडीओपी भावना दांगी का फोन लगातार स्विच ऑफ है।

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