
दमोह. दमोह नगर में डेढ़ दर्जन से अधिक मैरिज गार्डन बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं. जबकि नगर पालिका में रजिस्टर्ड केवल सात मैरिज गार्डन पर ही कई करोड़ रुपए का कर बकाया है. लेकिन नगर पालिका ने वसूल नहीं पा रही है. अंधेर नगरी चौपट राजा टका सेर भाजी टका सेर खाजा, भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटक की यह पंक्तियां दमोह नगरीय क्षेत्र में बखूबी लागू होती हैं. दमोह नगर पालिका का सीमा विस्तार होने के बाद रिकॉर्ड में करीब 25 से अधिक मैरिज गार्डन हैं. लेकिन इस रिकॉर्ड में करीब सात मैरिज गार्डन ऐसे हैं जो अनुमति लेकर संचालित हो रहे हैं. उनमें से भी एक गार्डन अब बंद हो चुका है. मतलब सिर्फ 6 मैरिज गार्डन ही बाकायदा रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनमें भी कई कमियां है. इन सभी मैरिज गार्डन पर कई करोड़ रुपए का कई वर्षों से कर बकाया है. लेकिन नगर पालिका कर वसूल नहीं कर पा रही है. अधिकांश मैरिज गार्डन किसी नेता या प्रभावशाली व्यक्ति के हैं जिनके कारण नगर पालिका उन पर हाथ नहीं डाल पा रही है. हाल ही में दमोह पुलिस ने 6 ऐसे मैरिज गार्डन संचालकों पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज की है जो नियमों से इतर संचालन कर रहे हैं. इसके बाद सभी मैरिज गार्डन संचालकों की पुलिस और नगर पालिका के साथ एक बैठक भी की गई तथा उन्हें गाइडलाइन के अनुसार मैरिज गार्डन चलाने और रजिस्ट्रेशन कराने की हिदायत दी गई. पुलिस ने राधिका पैलेस, दमयंती मैरिज गार्डन, विद्या वाटिका, महावीर पैलेस, कृष्णा पैलेस तथा पवित्र बंधन मैरिज गार्डन पर विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किए हैं.दमोह नगर पालिका में जो मैरिज गार्डन रजिस्टर्ड हैं उनमें सबसे अधिक कर बंद हो चुके मरोठी मैरिज गार्डन पर बकाया है. मरोठी गार्डन पर वर्ष 1997-98 से कर बकाया है. जो 2025 तक की स्थिति में 6 करोड़ 24 लाख 789 रुपए बैठता है. इसी तरह बड़ी देवी मैरिज गार्डन पर 2021 से लेकर हाल की स्थिति तक 13 लाख 16 हजार 984 कर बकाया है. इसके अलावा मां कीर्ति परिसर पर 7 लाख 7 हजार 248 का कर बाकी है. इसी तरह आशीर्वाद गार्डन पर 2 लाख 53 हजार 451 रुपए करवाया है. शहर में कई मैरिज गार्डन ऐसे हैं. जो लंबे समय से संचालित हो रहे हैं. लेकिन उन्होंने अपना पंजीयन नगर पालिका में नहीं कराया. जबकि उस स्थिति से लेकर अब तक इनके ऊपर भी कई लाखों रुपए का टैक्स बनता है. नगर पालिका ने आज तक इन मैरिज गार्डन संचालकों पर कभी दबाव ही नहीं बनाया कि वह रजिस्ट्रेशन करा कर टैक्स जमा करें. दरअसल सबसे बड़ी समस्या यह है की कोई एक दर्जन मैरिज गार्डन हाल ही में नगरीय सीमा के अंतर्गत आए हैं. नगर पालिका सीमा का विस्तार होने के बाद भी इनके कर संबंधी कार्य में रुचि नहीं दिखाई. अक्टूबर 2024 को ही जनपद पंचायत ने 9 ग्राम पंचायत के 12 ग्रामों को बाकायदा नगर पालिका को सुपुर्द कर दिया था. जिसका राजपत्र में प्रकाशन हो चुका है. लेकिन इसके बाद भी नगर पालिका इन ग्रामीण क्षेत्र के व्यावसायिक स्थलों से टैक्स वसूल नहीं कर पा रही है.इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेंद्र सिंह लोधी का कहना है कि मैरिज गार्डन के कारण जाम लग गया था जिस एंबुलेंस फस गई थी. इसके बाद 6 मैरिज गार्डन पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज की गई. उन्हें गाइडलाइन के अनुसार गार्डन संचालित करने के लिए बैठक में निर्देश दिए गए हैं. हमारे जो मानदंड है और कैसे उनका रजिस्ट्रेशन कराया जाए इसकी भी हमने जानकारी दी है. कचरा निष्पादन, सुरक्षा गार्ड, फायर सेफ्टी, पार्किंग और डीजे सहित तमाम व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं. बकाया टैक्स के संबंध में सीएमओ ने बताया कि जो गार्डन संचालक टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं उन पर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी.

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