
दमोह. राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की टीम ने आज जिले के हिंडोरिया अनुसूचित जाति छात्रावास का निरीक्षण किया. जिसमें यह पाया गया कि यहां कभी भी झालावाड़ जैसा हादसा हो सकता है. इस मामले में उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई है.
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की दो सदस्यीय टीम आज दमोह पहुंची. यहां पर उन्होंने बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष एडवोकेट दीपक तिवारी एवं अन्य सदस्यों के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ एक बैठक ली एवं जिले के हिंडोरिया थाना क्षेत्र स्थित अनुसूचित जाति बालक छात्रावास का निरीक्षण भी किया. उन्होंने निरीक्षण में कई गंभीर अनियमितताएं पाई साथ ही यह तल्ख टिप्पणी की यहां पर कभी भी झालावाड़ जैसा हादसा हो सकता है. इसलिए तुरंत ही जिला प्रशासन इस मामले में गंभीरता पूर्वक एक्शन ले. हिंडोरिया में छात्रावास भवन की नई बिल्डिंग बनकर तैयार हो चुकी है लेकिन वह अभी तक शिक्षा विभाग को हैंडोवर नहीं की गई है जिसके कारण पुरानी क्षतिग्रस्त बिल्डिंग में ही बच्चे रह रहे हैं. आयोग ने जो अनियमितताएं यहां पर दर्ज की है उनमें पाया कि 50 बच्चों की क्षमता वाले इस छात्रावास में 43 बच्चे दर्ज हैं. जबकि मौके पर बीस ही पाए गए. आयोग ने यह माना कि यहां पर बाकी के बीस बच्चे घर बैठे ही छात्रवृत्ति ले रही हैं या फिर यहां के अधिकारी छात्रों को मिलने वाली सुविधा का लाभ खुद उठा रहे हैं. बिल्डिंग इतनी जर्जर हो चुकी है की जगह-जगह से दीवारें क्रेक हो गई हैं. छत का प्लास्टर उधड़ चुका है. पूरे में पानी का रिसाव होता है. जिससे कभी भी बिल्डिंग गिर सकती है. इसके अलावा टॉयलेट के दरवाजे टूटे हुए पाए गए. पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. आरो की जगह छत पर खुले में बनाई गई पानी की टंकी का ही पानी पेयजल के रूप में बच्चों को दिया जा रहा है. यह इतना गंभीर मसला है कि भले ही बिल्डिंग गिरने से कोई बाद में घटना हो लेकिन पानी के कारण भयंकर बीमारी की चपेट में तो बच्चे आ ही सकते हैं.
इस संबंध में आयोग ने कलेक्टर सुधीर कुमार कुचर से चर्चा की एवं शीघ्र नई बिल्डिंग का हैंडोवर करने एवं उसी में बच्चों को शिफ्ट करने के लिए कहा है. इस संबंध में आयोग की सदस्य निवेदिता शर्मा ने बताया कि कई सारे विषयों पर अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें निर्देश दिए हैं. कुछ गंभीर मसले भी सामने आए हैं. उन्हीं में एक हिंडोरिया छात्रावास का निरीक्षण है. जिसमें दर्ज संख्या के अनुसार बच्चे नहीं पाए गए. यह बच्चे घर बैठे छात्रवृत्ति ले रहे हैं. पानी इतना गंदा है कि उसे हम और आप उसे पी नहीं सकते लेकिन वही गंदा पानी बच्चे पी रहे हैं. बिल्डिंग क्षतिग्रस्त है जो कभी भी गिर सकती है, और झालावाड़ जैसा हादसा हो सकता है. इसके लिए हमने कलेक्टर से बात की है. बिल्डिंग मरम्मत के लिए कोई मदद नहीं है इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है. टॉयलेट में दरवाजे नहीं है.

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