
दमोह. हटा नगर के बहु चर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में एडीजे कोर्ट ने 26 में से 25 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. एक आरोपी अभी भी फरार है. फैसला सुनाए जाने के दौरान हटा कोर्ट छावनी की तरह है तब्दील किया गया था.
प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में को उफान पर लाने वाले बहुचर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में आखिरकार लंबे इंतजार के बाद आज हटा कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. हत्या के 26 आरोपियों में से 25 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. सभी आरोपियो को आई पी सी की धारा 302/149 में आजीवन कारावास के साथ 10 हज़ार रुपए अर्थदंड की सजा, धारा 323/149 आई पी सी में एक एक साल का कारावास एवं पांच पांच सौ रुपए जुर्माना एवं धारा 148 में तीन तीन वर्ष का कारावास एवं एक एक हज़ार रुपये अर्थ दंड की सजा से दंडित किया गया है. सभी सजाएं एक साथ भुगताये जाने का आदेश दिया है. गौर तलब है कि वर्ष 2018 में पथरिया से जिला पंचायत की उपाध्यक्ष रामबाई परिहार बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधायक चुनी गई थी. चुनाव में कांग्रेस की सरकार चुने जाने की दरमियां ही बहुजन समाज पार्टी का साथ छोड़कर कद्दावर नेता हटा निवासी देवेंद्र चौरसिया ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ की सभा में ही कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी. मंच से कमलनाथ ने भी उनकी तकलीफ को समझते हुए उन्हें पूर्ण रूप से सुरक्षा मुहैया कराए जाने का आश्वासन दिया था. लेकिन महज यह आश्वासन चंद घंटे भी पूरे नहीं कर पाया और हटा स्थित देवेंद्र चौरसिया के गिट्टी क्रेशर प्लांट पर 19 लोगों ने उन पर पर कातिलाना हमला कर उनकी हत्या कर दी थी. वहीं उनके बेटे सोमेश चौरसिया को मरणासन्न अवस्था में छोड़कर फरार हो गए थे. पुलिस ने सोमेश चौरसिया के मृत्यु कालिक कथनों के आधार पर पथरिया विधायक राम बाई के पति गोविंद परिहार, उनके देवर कौशलेंद्र उर्फ चंदू परिहार, भतीजे गोलू परिहार सहित श्रीराम शर्मा, अमज़द खान, लोकेश पटेल, तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के बेटे एवं वर्तमान में जेल में निरुद्ध हटा जनपद अध्यक्ष इंद्रपाल पटेल, अनीश, सोहिल पठान, शाहरुख, मोनू, आकाश सिँह, संदीप तोमर, सुकेंद्र, बलवीर, विक्रम, राजा डॉन, खूबचंद, फुकलू, शैलू, किशन, मजहर मजहर आदि के विरुद्ध धारा 302 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया था लेकिन कमलनाथ सरकार के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने मामले में पुनर विवेचना जारी किए थे. इसी बीच पुलिस प्रशासन के दबाव एवं राम भाई के परिजनों के दबाव के चलते पीड़ित चौरसिया परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया सुप्रीम कोर्ट में मामला संज्ञान में आने के बाद कोर्ट के ही आदेश पर एक बार पुनः हत्या का आरोपी बनाया गया था सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ही पुलिस प्रशासन ने शक्ति की जिसके बाद गोविंद परिहार ने भिंड में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था कुल मिलाकर पूरे मामले में 25 आरोपियों की गिरफ्तारियां हुई थी जबकि एक आरोपी मामले में अभी भी फरार चल रहा है.
*क्या हुआ था मामले में*
राम बाई अपने समय की एकमात्र महिला और दबंग विधायक के रूप में जानी जाती हैं. राम बाई के कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के नेताओं से गहरे संबंध हैं. जिसके कारण राजनीतिक हस्तक्षेप का आलम यह था कि मामले की सुनवाई कर रहे विद्वान न्यायाधीश श्री सोनकर को तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव सिंह एवं तत्कालीन एसडीओपी भावना दांगी ने कई तरह की धमकियां दी थी. इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट श्री सोनकर ने सुप्रीम कोर्ट को की थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को अपने हैंडोवर करते हुए सुनवाई जारी रखने के आदेश जारी किए थे. उधर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद प्रदेश सरकार ने एसटीएफ को गोविंद परिहार की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे. उसी दरमियान एसटीएफ के एडीजी विपिन माहेश्वरी भी हटा पहुंचे थे. साथ ही उन्होंने देवेंद्र चौरसिया के परिजनों, श्री सोनकर सहित विभिन्न लोगों से मुलाकात भी की थी. इसके बाद लगातार दबाव बढ़ता गया और राम बाई के पति गोविंद परिहार को सरेंडर करना पड़ा. उनके कई अन्य साथियों की भी गिरफ्तारी हो गई. इसके बाद मामले में तेजी आई और आज आखिरकार फैसला भी हो गया. इस पूरे मामले में कोर्ट ने जो फैसला दिया है उसमें त्रिलोक नाम का एक आरोपी अभी भी फरार है जबकि एक आरोपी विकास पटेल को केवल आरोपियों को अपने घर में बना है देने का आरोप है कोर्ट ने उसे रियायत देते हुए बरी कर दिया है.

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