
दमोह. जिले में बेहाल स्वास्थ्य सेवाओं के बीच अस्पताल के बाहर एक महिला के द्वारा जमीन पर बच्चे को जन्म दिए जाने का मामला सामने आया है. घटना संज्ञान में आते ही सागर से आई टीम ने मामले की जांच की तथा इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया. मामला मड़ियादो क्षेत्र के वर्धा गांव का है.
दमोह जिले में चरमरा चुकी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच एक भयावह करने वाली तस्वीर सामने आई है. मामला हटा ब्लॉक के अंतर्गत आने उप स्वास्थ्य केंद्र ग्राम वर्धा का है. दरअसल वर्धा ग्राम निवासी महिला मनीषा पत्नी नारायण आदिवासी इस कदर दर्द से कराह रही थी कि उसे कहीं और ले जाना संभव नहीं था. ऐसे में परिजनों ने महिला को बंद उप स्वास्थ्य केंद्र के बाहर ही पत्थरों पर लिटा दिया और वहीं पर उसने एक बच्चे को जन्म दिया. स्वास्थ्य कर्मचारियों की घोर लापरवाही और मानवीयता को शर्मसार करने वाली इस घटना का मामला जब वायरल हुआ तो स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी हरकत में आ गए. इस दौरान जांच करने सागर और दमोह से स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची आज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ियादो और उपस्वास्थ्य केंद्र वर्धा पहुंची. प्रसूति महिला से संपर्क कर वस्तु स्थिति का पता किया गया.
** घटना की जांच करने पहुंची टीम को स्वास्थ्य अमले की घोर लापरवाही के साथ ही आंगनबाड़ी कर्मचारी की उदासीनता और अमानवीयता भी सामने दिखाई दी. मामले में आंगनबाड़ी के कर्मचारियों द्वारा प्रसव को अनदेखा किए जाने की बात सामने आई. उपस्वास्थ्य केंद्र वर्धा में पदस्थ सीएचओ वर्षा राज खुद गर्भवती हैं और छुट्टी पर हैं. लेकिन एएनएम निवेदिता उमरे 300 मीटर की दूरी पर आंगनबाड़ी केंद्र पर टीकाकरण कर रही थी. इसके अलावा जहा खुले में महिला का प्रसव हुआ उससे 10 मीटर की दूरी पर उसी परिसर में आगनवाड़ी केंद्र खुला था. जिसमें आगनवाड़ी कार्यकर्ता, साहियका उपस्थित थी. लेकिन किसी ने भी खुले में हो रहे प्रसव को पर्दा देने की जरूरत नहीं समझी.
*ये हैं अनिमियताएं* मड़ियादो पहुंची जिला स्वास्थ अधिकारी रीता चटर्जी को मड़ियादो प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में अनिमियताएं देखने मिली. अस्पताल परिसर में गंदा पानी भरा हुआ था. जिसमे मच्छर पनप रहे हैं. दो सितंबर को अस्पताल से घर गई प्रसूति महिला को आगे की डेट 4 सितंबर को डिस्चार्ज करना दिखाया गया. केस सीट कर्मचारियों द्वारा नही भरी पाई गई. रोगी कल्याण समिति का ब्यौरा प्रबंधन नहीं दे पाया. इसके अलावा सफाई, स्वास्थ्य सुविधाएं आदि की अनिमियताएँ भी पाई गई. वहीं वर्धा उपस्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों के नंबर नहीं लिखे गए. सूचना के बाद भी एएनएम द्वारा गंभीरता नहीं बरती गई. क्षेत्र में स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा गर्भवती महिला, खून की कमी से जूझ रही महिलाओं, कुपोषित बच्चों आदि पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इस दौरान सागर से संभागीय समन्वयक कपिल चौबे, सीबीएमओ हटा उमा शंकर पटेल, बुद्धदन तंतुवाय उपस्थित थे.
इस मामले में रीता चटर्जी जिला स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी और दोष सिद्ध कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी. प्रसूति महिला के घर पहुंचने पर खून की कमी से जूझ रही दो महिलाएं मिली हैं. जिन्हे इलाज हेतु हटा बुलाया गया है. इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाएं जरूरतमंद तक पहुंचे इसलिए कुछ विशेष योजना बनाकर काम करने की तैयारी की जा रही है.

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