मार्च 17, 2026

कांग्रेस प्रत्याशी के बयान पर बसपा में बवाल अनाउंसमेंट कराकर दे रहे हैं सफाई

दमोह। दमोह के चुनावी दंगल में एक करोड़ रुपए की एंट्री के बाद अब राजनीति में हड़कंप मच गया है। कांग्रेस विधायक के बयान पर बसपा ने जवाब दिया है।
कहते हैं की राजनीति में सब कुछ जायज होता है। न इसमें कोई किसी का दोस्त होता है और न कोई दुश्मन होता है। समय के साथ सब कुछ क्षण भर में बदल जाता है। ऐसा ही कुछ इस चुनाव में भी दिख रहा है। दमोह के चुनावी दंगल में आरोप प्रत्यारोप के साथ अब एक करोड रुपए की एंट्री हो गई है। इस एंट्री के बाद राजनीतिक दलों में घमासान मचा हुआ है। दरअसल दमोह विधायक एवं कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन के उस बयान पर बसपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें अजय टंडन ने बसपा प्रत्याशी को भाजपा की बी टीम बताया था। अजय टंडन ने एक सभा में कहा था कि भाजपा के प्रत्याशी जयंत मलैया ने बसपा प्रत्याशी प्रताप रोहित को एक करोड रुपए देकर चुनाव में खड़ा किया है। ताकि कांग्रेस का नुकसान किया जा सके। अब इस वीडियो के वायरल होने के बाद बसपा तिलमिलाई हुई है। बसपा की प्रचार गाड़ियां जगह-जगह पर अनाउंस करके उसे वीडियो का जवाब दे रही हैं।

एक करोड़ पर बसपा की सफाई

देर रात्रि बसपा का प्रचार वाहन जब अंबेडकर चौक पर पहुंचा तो उसका अनाउंसमेंट सुनकर लोग हक्के-बक्के रह गए। अनाउंसमेंट में कहा गया है कि अजय टंडन बौखला गए हैं। हार के डर के कारण एक सभा में उन्होंने कहा कि हाथी वाले प्रत्याशी को फूल वाले जयंत मलैया ने एक करोड रुपए देकर खड़ा किया है। वह कांग्रेस को हराने के लिए खड़ा किया गया है। बसपा ने दावा किया है की बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी प्रताप रोहित भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर के दमोह विधानसभा की अंदर बहुजन समाज पार्टी का परचम लहराने का काम करेगी।

निर्वाचन आयोग ले संज्ञान

इस अनाउंस के बाद दमोह में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि वास्तव में वायरल वीडियो और अनाउंसमेंट की क्या सच्चाई है। अब चाय पानी के टपरों पर भी यह चर्चा हो रही है बसपा प्रत्याशी एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। लेकिन जिस तरह से वह प्रचार में पैसा फूंक रहे हैं तो उनके पास आखिर इतनी फंडिंग कहां से आई ? यह जांच का भी विषय है। यहां पर इस बात पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं क्या वास्तव में भाजपा प्रत्याशी जयंत मलैया ने बसपा प्रत्याशी को पैसा देकर डंप किया है। ताकि कांग्रेस की वोट काटी जा सके या फिर मामला कुछ और ही है? हालांकि अभी यह दोनों वीडियो और अनाउंसमेंट सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए। पूरे मामले की निर्वाचन आयोग को जांच करनी चाहिए कि किस पार्टी के पास कहां से कितनी फंडिंग आ रही है? उस प्रत्याशी की आर्थिक स्थिति कितनी मजबूत है और कितनी गाड़ियां प्रतिदिन प्रचार वाहन में लगी हैं? उनका बाजार मूल्य पर प्रतिदिन का भाड़ा कितना होता है? साउंड, झंडा बैनर इन सभी का भी कितना खर्च बनता है? सैकड़ो कार्यकर्ताओं के लिए प्रतिदिन दोनों समय भोजन और नाश्ता पानी की व्यवस्था में कितना रुपए खर्च हो रहा है? इस पर निर्वाचन आयोग को पैनी निगाह रखना होगी।

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