मार्च 17, 2026

43 साल बाद फिर धमाके में मरे तीन लोग

दमोह। पटाखा फैक्ट्री में हुए बम विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि करीब एक दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है। अब प्रशासन इस मामले में जांच करने की बात कह रहा है।
दमोह नगर में आज दोपहर पटाखा फैक्ट्री कम गोदाम में हुए एक भीषण विस्फोट में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। धमाका इतना जोरदार था कि आधा किलोमीटर से अधिक तक की दूरी पर इसे सुना गया। जिस मकान में यह धमाका हुआ उसकी पक्की छत के परखच्चे उड़ गए। आसपास के कई मकानों में दरारें आ गई। धमाके का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की दुकान गोदाम मालिक अभय गुप्ता का शव कई टुकड़ों में विभक्त हो गया। उसके हाथ का पंजा अभी भी घटनास्थल पर ही पड़ा हुआ है। शव को बोरियों में समेटा गया। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों ने दो अन्य लोगों की भी मौत की पुष्टि की है। जबकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कम से कम पांच लोग इस धमाके में मारे गए हैं। कई घंटे की मशक्कत के बाद जब मलबे को हटाया गया तो एक महिला मृत मिली जबकि एक अन्य महिला घायल अवस्था में पाई गई। मृतक महिला की शिनाख्त पूजा उर्फ अपूर्वा 19 वर्ष पत्नी कैलाश खटीक के रूप में की गई। इसी तरह एक अन्य महिला की शिनाख्त रिंकी पुत्री शंकर लाल कोरी निवासी कछियाना मोहल्ला के रूप में की गई। सभी मृतकों के शव मर्चुरी में रखवाए गए हैं। जबकि घायलों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। घटना में घायल उमा कोरी ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि कुछ देर के लिए तो कान में कुछ सुनाई देना भी बंद हो गया था। जिसको जहां जगह मिली वह वहां भगाने का प्रयास करने लगा। सबसे पहले एक पटाखे में विस्फोट हुआ और उसी के बाद वहां पर बोरियों में भरी हुई बारूद और अन्य पटाखो में जोरदार धमाका हुआ। घटना के संबंध में कलेक्टर मयंक अग्रवाल का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। घटना में कौन दोषी है इसके लिए न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। ठीक इसी बात को एसपी सुनील तिवारी ने भी दोहराया। जबकि मौके पर पहुंचे कांग्रेस प्रत्याशी और दमोह विधायक अजय टंडन ने कहा कि शहर के बीचो-बीच इस घटना के लिए प्रशासन और जो यह फैक्ट्री चला रहा था वह स्वयं भी दोषी है। इस मामले में प्रशासन और शासन से मांग करता हूं कि जो भी घायल हैं उनके समुचित उपचार की व्यवस्था की जाए। मैं स्वयं भी अपनी ओर से प्रयास करूंगा। हैरानी की बात है कि शहर के बीचो-बीच इस तरह की घटना आखिर हुई कैसे?
इस पूरे मामले में प्रशासन की घोर लापरवाही भी सामने आई है। पिछले हफ्ते ही निर्वाचन संबंधी एक प्रेस वार्ता में इस मसले को उठाया गया था। लेकिन कलेक्टर अग्रवाल ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ दिया कि जो भी गड़बड़ी करेगा उसके विरुद्ध हम कार्रवाई करेंगे। हम केवल थोक दुकानदारों की मॉनिटरिंग करते हैं, फुटकर व्यापारियों की नहीं।
प्रत्यक्षदर्शियों और पड़ोसियों का कहना है कि यह गोदाम पूरी तरह से अवैध रूप से संचालित हो रही थी। यहां पर बारूद से संबंधी अवैध कारोबार लंबे समय से हो रहा था इसकी शिकायत कई बार लोग प्रशासन को कर चुके हैं। 6 दिन पहले ही इस मामले में शिकायत की गई थी। उसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। जिससे यह पड़ी घटना सामने आई है। कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने बताया कि शहरी क्षेत्र में यह गोदाम और फैक्ट्री कैसे संचालित हो रही थी इसकी जांच कराई जा रही है। क्योंकि परमिशन केवल इमलाई गांव के लिए दी गई थी।

43 साल पहले भी हुई थी घटना

दमोह शहर में यह पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी ऐसी एक घटना हो चुकी है। जून 1981 में अभय गुप्ता के पिता कृष्ण कुमार गुप्ता जब पटाखा का लाइसेंस लेकर कारोबार चला रहे थे उसे समय घटना स्थल से कुछ दूरी पर उनके निवास पर भी ऐसा ही एक धमाका हुआ था। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी।

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