दमोह। हटा के बाद अब दमोह में स्वाइन फ्लू कहर बरपा रहा है। पिछले एक सप्ताह में करीब 3000 से अधिक सुअरों की मौत हो चुकी है। लेकिन पशु चिकित्सा विभाग गहरी निंद्रा में लीन है।
पिछले दिनों हटा में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के मामले देखे जाने के बाद हरकत में आए पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 150 से ज्यादा सूअरों को इंजेक्शन लगा कर मार दिया था। जिसके कारण वहां पर स्वाइन फ्लू गंभीर रूप से नहीं फैल पाया, लेकिन दमोह में स्थिति एकदम उलट है। यहां पर पिछले 1 सप्ताह में 3000 से अधिक सुअर अफ्रीकन स्वाइन फ्लू की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। फिर भी पशु चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। सुअर पालकों की माने तो रोजाना दर्जनों की संख्या में सुअर मर रहे हैं। सूअर क्यों मर रहे हैं और क्या बीमारी है इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। सुअर पालक गुटरु वंशकार ने बताया कि उनके 17 नग सूअर एक ही दिन में मर गए। इसकी सूचना पशु स्वास्थ्य विभाग को दी तो जवाब मिला कि उन्हें दफना दिया जाए। लेकिन जांच करने कोई भी नहीं आया। एक अन्य सूअर पालक गुलवशिया वंशकार का कहना है कि बार-बार पशु चिकित्सा विभाग को सूचना दी गई लेकिन कोई भी जांच करने नहीं आया। न ही यह पता चल पाया कि आखिर इन सुअरों की बेवजह है लगातार मौते कैसे हो रही हैं। बताया जाता है कि दमोह में करीब 70 से अधिक सुअर पालक हैं और उनकी रोजी-रोटी का यही एकमात्र जरिया हैं। कैदों की तलैया तथा किशन तलैया में सर्वाधिक सुअर पालक रहते हैं। सुअर पालक बताते हैं कि इनको वह 3 से 4 हज़ार रुपए तक में बेचते हैं। इन से प्राप्त होने वाला बाल काफी महंगा मिलता है। इसके अलावा कुछ शौकीन लोग इसका मांस भी सेवन करते हैं। सूअर पालकों का कहना है कि यदि सरकार उन्हें मुआवजा देती है तो उनका व्यवसाय फिर से शुरू हो सकता है और यदि मौत जा नहीं किया तो वह सड़क पर आ जाएंगे।

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