मार्च 17, 2026

इंद्रपाल पटेल की जमानत अर्जी निरस्त, जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के सम्मिलन में नहीं दे पाएगा वोट

जनपद सदस्य को नहीं मिली वोट करने की अनुमति
न्यायालय ने निरस्त की वोट पेरोल याचिका
देवेन्द्र चौरसिया हत्याकांड में जेल में रहने के दौरान गैसाबाद से जनपद सदस्य चुने गए थे इंद्रपाल

फिलहाल अध्यक्ष पद की वोटिंग को लेकर संशय है बरकरार
दमोह। हटा न्यायालय ने जेल में बंद कैदी इंद्रपाल की ओर से जनपद सदस्य बनने के उपरांत अध्यक्ष पद पर वोट करने की अनुमति व अध्यक्ष पद के चुनाव सम्मिलन में भाग लेने की इंद्रपाल पटेल की याचिका निरस्त कर दी है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल बड़ा झटका लगा है। हटा न्यायालय ने जेल में निरुद्ध उनके पुत्र इंद्रपाल पटेल की जमानत निरस्त कर दी है। गौरतलब है की विगत करीब साढ़े तीन साल से देवेन्द्र चौरसिया हत्याकांड में हटा जेल में बंदी है। जेल में रहने के दौरान विगत दिनों न्यायालय की अनुमति से इंद्रपाल ने गैसाबाद से जनपद सदस्य का पर्चा दाखिल किया था। जिसमे वह विजयी भी हुआ। किंतु अब कल 27 तारीख को जनपद प्रतिनिधियों का सम्मिलन होना है। जिसमें अध्यक्ष पद का चुनाव भी होना नियत है। ऐसी स्थिति में इंद्रपाल की ओर से अभिरक्षा में रहते हुए वोट करने एवं सम्मिलन में शामिल होने न्यायालय से अनुमति चाही थी। जिसे हटा न्यायालय ने सुनवाई के उपरांत निरस्त कर दिया है। मामले में आपत्तिकर्ता सोमेश चौरसिया की ओर से हटा न्यायालय में पैरवी कर रहे वकील मनीष नगाइच व गजेंद्र चौबे ने बताया के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 62 किसी भी बंदी को वोट करने का अधिकार नहीं देती है। नगाइच अधिवक्ता का न्यायालय में तर्क था कि वोट करने का अधिकार किसी बंदी का मौलिक अधिकार नहीं है। ऐसी स्थिति में इंद्रपाल को जेल में रहने के दौरान जनपद में वोट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हाई कोर्ट से निरस्त हो चुकी है जमानत
न्यायालय को बताया गया कि इस आरोपी की जमानत माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में निरस्त की जा चुकी है, साथ ही यह संवेदनशील मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रहा है।
सारी बहस दलील एवं दोनों पक्षों की ओर से पेश सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के आधार पर न्यायालय ने इंद्रपाल की ओर से प्रस्तुत वोट पेरोल आवेदन निरस्त कर दिया है।
अध्यक्ष पद पर बना संशय
फिलहाल इस वोट पेरोल आवेदन के निरस्त होने के बाद जनपद पंचायत हटा के सदस्य सम्मिलन व उसमें होने वाले जनपद अध्यक्ष के चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह अंकित हो गया है। अलग अलग दलों से अध्यक्ष पद पाने का दंभ भरने वाले गुटों की कवायद पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है। वहीं दूसरी ओर कुछ समर्थकों के साथ बाड़ाबंदी और भूमिगत होने वाले जनपद सदस्यों को भी ज्यादा दिन रोके रहना टेडी खीर साबित हो रहा है।
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