
दमोह. गांव गांव में खुली नशे की मधुशाला को बंद करने को लेकर भगवती मानव कल्याण संगठन ने आज कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. 15 दिन में कार्रवाई न होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी गई है.
भगवती मानव कल्याण संगठन जिले का एकमात्र ऐसा संगठन है जिसके कार्यकर्ता सड़कों पर जाकर शराब पकड़ते हैं और उन्हें पुलिस के हवाले करते हैं. इसके अलावा गांव-गांव में शराब मुक्ति का संकल्प भी दिलाया जा रहा है. बावजूद इसके अवैध रूप से गांव गांव में और घरों में शराब पहुंच रही है. इसी के विरोध में आज भगवती मानव कल्याण संगठन के हजारों कार्यकर्ताओं ने कलेक्टोरेट पहुंचकर हल्ला बोलकर अपनी आवाज बुलंद की. संगठन ने कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को एक ज्ञापन देकर अपनी मांगे रखी. संगठन ने आरोप लगाया जिले की विभिन्न तहसीलों में आबकारी विभाग की मिलीभगत से शराब दुकानों का अनियमित संचालन किया जा रहा है तथा गांव-गांव अवैध रूप से शराब पहुंचाकर बिक्री कराई जा रही है. शासन द्वारा निर्धारित समय सीमा एवं नियमों का पालन शराब दुकानों में नहीं किया जा रहा. कई दुकानें समय से पहले खोली जा रही हैं और देर रात तक संचालित होती हैं. वहीं शराब ठेकेदारों द्वारा गांवों में अवैध रूप से शराब भिजवाने का भी आरोप लगाया गया. ज्ञापन में मांग की गई कि अवैध शराब परिवहन करते पकड़े जाने पर केवल कर्मचारी ही नहीं बल्कि मुख्य ठेकेदार एवं विक्रेता को भी सह आरोपी बनाया जाए. साथ ही स्कूल, मंदिर, अस्पताल एवं रिहायशी क्षेत्रों के समीप संचालित शराब दुकानों को हटाकर अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए. संगठन ने प्रत्येक शराब दुकान पर स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक करने, कर्मचारियों के नाम एवं फोटो प्रदर्शित करने तथा आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को कार्य पर न रखने की मांग भी उठाई. वहीं अवैध शराब बिक्री पाए जाने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की गई. ज्ञापन में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम एवं सार्वजनिक हेल्पलाइन नंबर जारी करने की मांग भी रखी गई, ताकि शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई हो सके. संगठन ने बताया कि वह वर्षों से जिले में नशामुक्ति अभियान चला रहा है और 200 से अधिक ग्राम पंचायतों में नशामुक्ति के प्रस्ताव पारित कराए जा चुके हैं. इसके बावजूद गांवों में दोबारा अवैध शराब पहुंचाई जा रही है. ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम देवरान में ग्रामीणों के विरोध के बाद शराब दुकान सील की गई थी, लेकिन बाद में सील तोड़कर बड़ी मात्रा में शराब गांवों में भेजी गई.

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