June 1, 2026

दमोह बहुत पिछड़ा है, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं: नवागत कलेक्टर

दमोह. दमोह जिला काफी पिछड़ा हुआ है. यहां पर गंदगी बहुत है, जिसके कारण दमोह का नाम खराब है. स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं. जल संकट भी है. इन सब व्यवस्थाओं को ठीक करने के लिए हमें और आपको मिलकर काम करना होगा. कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के इस बयान ने सच्चाई का आईना तो दिखाया है लेकिन दमोह जिले की साख पर एक प्रश्न चिन्ह लग गया है?

    निवर्तमान कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के स्थानांतरण के बाद आज दमोह जिले के 44 में कलेक्टर के रूप में 2016 बैच के आईएएस अफसर प्रताप नारायण यादव ने दमोह कलेक्टर का पदभार ग्रहण किया. इस मौके पर उन्होंने मीडिया से बातचीत की लेकिन उनके बयान के बाद दमोह जिले और अब तक के 43 कलेक्टरों की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं. उन्होंने कहा वह इसी बुंदेलखंड की धरती के रहने वाले हैं. और उन्हें यहीं काम करने का अवसर मिला है. यह सौभाग्य की बात है, लेकिन जैसा मैं अखबार में पढ़ता हूं, देखता हूं तो पता चलता है कि यहां पर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बहुत अधिक है. दमोह जिला काफी पिछड़ा हुआ है. यहां गंदगी बहुत ज्यादा है और स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई है. जिससे दमोह का नाम खराब होता है. उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता किसानों की समस्याएं हल की जाएं. उनके लिए एक किसान केंद्र बनाएंगे. यहां पर गरीबी बहुत अधिक है. इसलिए ऐसे बेरोजगारों को रोजगार दिलाने का प्रयास करेंगे जो योग्य तो हैं लेकिन उनके पास कोई काम धंधा नहीं है.

    श्री यादव ने बातचीत में कहा आज मैंने अधिकारियों की बैठक ली और उनसे कहा कि हमारा उद्देश्य केवल योजनाओं का लक्ष्य प्राप्त कर लेना नहीं है, कि काग़ज़ी प्रतिपूर्ति कर ली और हो गया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति बीमार है. 10 साल से 50 साल से 60 साल से लेकिन मरीज़ बीमार का बीमार पड़ा है. उसमें सुधार होना चाहिए. आप फेल हो रहे हैं हर साल और कह रहे हैं कि मैं पढ़ाई कर रहा हूं इस बात को मम्मी पापा नहीं मानते कि आप पढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि दमोह में अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है. मैंने अधिकारियों से कहा है कि आप कार्यालय में न रहें. लोगों से मिलिए उनकी समस्याएं सुनिए और कानून के दायरे में रहकर उन्हें हल कीजिए. श्री यादव ने कहा कि मैंने पीएचई से जानकारी ली तो पता चला 106 गांव में जल संकट है. उनकी तैयारी कुछ नहीं है. मैंने उनसे डिटेल प्लान मांगा है. नवागत कलेक्टर का उद्देश्य किसी पर तंज कसना नहीं था ? उन्होंने केवल दमोह जिले की व्यवस्थाओं का आईना दिखाया जो सत प्रतिशत सही भी है. लेकिन उनके इस बयान से अभी तक दमोह में काम कर चुके उन 43 कलेक्टर्स की साख पर बट्टा लग गया है जिन्होंने यहां काम करने के भरसक प्रयास किए, यह बात अलग है कि 100% सफलता किसी को नहीं मिली.

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