September 10, 2026

नदी की लहरों के बीच गोविंदा का गजब रोमांच, रस्सी के सहारे हवा में फूटी मटकी

दमोह. जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित होने वाली मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं तो बहुत होती हैं लेकिन मड़ियादो के पाटन गांव में होने वाली प्रतियोगिता जिले भर में अपनी अलग पहचान बना रही है.
श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व के अवसर पर जगह-जगह मटकी फोड़ प्रतियोगिता होती हैं और उसमें बड़ी संख्या में लोग भाग भी लेते हैं, लेकिन इन मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं से ग्रामीण और जंगली क्षेत्र भी अछूते नहीं है. जिले के मडियादो थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पाटन गांव में कुछ अलग ही तरह से मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया. सोमवार को आयोजित यह प्रतियोगिता देखने के लिए पाटन ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांव की लोग बड़ी संख्या में पहुंचे. इनमें से करीब 20 से अधिक युवाओं ने मटकी फोड़ प्रतियोगिता में अपना भाग्य गाजमाया और अंत में एक साहसी युवक ने मटकी फोड़ कर 5100 का इनाम पुरस्कार के रूप में जीता. गांव के गोवर्धन यादव ने बताया कि गांव के सभी लोग मिलकर यह प्रतियोगिता आयोजित करते हैं. इस बार कुछ अलग तरह से प्रतियोगिता की गई. जिसमें पाटन गांव से निकलने वाली नदी की दोनों छोर पर रस्सी बांध दी गई और बीच में दही की हांडी लटका दी गई. नदी के एक छोर से दूसरे छोर पर बांधी गई रस्सी की दूरी करीब 60 मीटर थी. बीच में बंधी मटकी को इस रस्सी के सहारे लटक लटक कर मटकी के पास जाकर फोड़ने का लक्ष्य रखा गया था. जिसमें 20 से अधिक युवाओं ने भाग लिया और एक-एक करके लोग मटकी फोड़ने के लिए रस्सी पर हाथों से लटकते हुए पहुंचते गए लेकिन लंबाई अधिक होने के कारण वह इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर सके.लिहाजा बीच रास्ते में ही रस्सी से हाथ छोड़ दिए और सीधे नदी में गिरे. हालांकि इस समय नदी में जिस जगह मटकी बांधी गई थी वहां का पानी का भराव बहाव कम था. इसलिए लोगों को कोई परेशानी नहीं हुई और मटकी फोड़ प्रतियोगिता में भाग लेने का आनंद भी उठाया. अंत में ग्राम के ही एक युवक नत्थू यादव ने इस लक्ष्य को पूरा किया और मटकी फोड़ दी. उसे 5100 रुपए का नगद पुरस्कार देकर विजयी घोषित किया गया. श्री यादव ने बताया कि यह परंपरा लुप्त होती जा रही है. इसलिए इस बार हमने इसे नए रूप में करने का निर्णय लिया. साथ ही इसमें यह भी शर्त रखी गई की 18 वर्ष से कम आयु वर्ग साथ ही ऐसे लोग जिन्हें तैरना नहीं आता है उन्हें भाग लेने पर रोक लगा दी गई. इस प्रतियोगिता में खास बात यह रही की वाले युवाओं से लेकर 65 साल तक की बुजुर्गों में अपना हाथ आजमाया और उत्साह पूर्वक मटकी फोड़ प्रतियोगिता में भाग लिया. यह बात अलग है कि उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. नत्थू यादव ने बताया कि इस प्रतियोगिता में भाग लेकर उन्हें बहुत अच्छा लगा. लंबाई अधिक होने के कारण रस्सी पर लटकने और उसकी सहारे नदी पार करने का जो लक्ष्य रखा गया था वह काफी कठिन था. इससे हाथ दर्द होने लगता है. और कई बार इसी कारण से प्रतियोगी रस्सी छोड़ देते हैं और वह नदी में गिर जाते थे ऐसी प्रतियोगिताएं नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति समझने का मौका होती हैं.

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